अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स को लेकर पंजाब में छिड़ा विवाद

Khelo India University Games In Controversy: देश के यूनिवर्सिटी खेलों की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स इस समय गंभीर सवालों के घेरे में हैं। आरोप हैं कि हाल के नियम बदलावों ने खेलों की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है और पंजाब सहित देश की सरकारी यूनिवर्सिटीज़ को पीछे धकेल दिया है।

देश के यूनिवर्सिटी खेलों की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स इस समय गंभीर सवालों के घेरे में हैं। आरोप हैं कि हाल के नियम बदलावों ने खेलों की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है और पंजाब सहित देश की सरकारी यूनिवर्सिटीज़ को पीछे धकेल दिया है। नियमों में बदलाव से पहले इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सिर्फ तीन मेडल आते थे। पिछले सेशन के दौरान इस यूनिवर्सिटी के मेडल तीन से बढ़कर 32 हो गए थे। जोकि मौजूदा सेशन में मेडल बढ़कर 42 हो गए। इसी बात को लेकर पंजाब में विवाद छिड़ गया है।

Khelo India University Games Controversy

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स

करीब 65 साल से MAKA ट्रॉफी पूरे साल के खेल प्रदर्शन पर दी जाती रही है। इसमें इंटरनेशनल टूर्नामेंट, AIU चैंपियनशिप और अलग-अलग खेलों में निरंतर प्रदर्शन को महत्व मिलता था। लेकिन 2023–24 के सत्र में, खेल सत्र खत्म होने के बाद अचानक नियम बदल दिए गए। पहले जहां KIUG का वेटेज सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत था, उसे पीछे की तारीख से लगभग 100 प्रतिशत कर दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि पूरे साल का प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और AIU प्रतियोगिताएं लगभग बेअसर हो गईं। इस बदलाव का सीधा फायदा उसी यूनिवर्सिटी को मिला, जिसने KIUG में ज्यादा गोल्ड मेडल जीते थे।

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