स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। सॉफ्ट टेनिस में भारत का पहला एशियन गेम्स मेडल जीतने का जय मीणा का सफर रैकेट से नहीं, बल्कि क्रिकेट में दिलचस्पी से शुरू हुआ था। कभी क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाले 14 साल के मीणा ने अब इतिहास रच दिया है। बुधवार को एशियाई खेलों में मेंस के सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्हें सेमीफाइनल में जापान के खिलाड़ी से हार का सामना करना पड़ा। मीणा का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद रोमांचक रहा है।
जय मीणा की विजय गाथा।
मीणा के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का सफर लगभग इत्तेफाक से शुरू हुआ। मध्य प्रदेश के देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में शामिल होने के बाद उन्हें एक सॉफ्ट टेनिस कोर्ट दिखा। शुरू में इस अनजान खेल के बारे में उत्सुकता होने पर उन्होंने पहले खिलाड़ियों को खेलते हुए देखा और फिर बॉल बॉय के तौर पर मदद करना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी खेलना शुरू कर दिया।
उत्सुकता वश शुरू हुआ करियर
जो शुरुआत उत्सुकता से हुई थी वह जल्द ही एक गंभीर खेल बन गई। मीणा ने स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत की और फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। 14 साल की उम्र तक वह सॉफ्ट टेनिस के गढ़ माने जाने वाले जापान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर रहे थे।
नेशनल गेम्स से बनाई पहचान
मीणा ने 2022 में गुजरात में हुए 36वें नेशनल गेम्स में मेंस के सिंगल्स में गोल्ड मेडल जीतकर भारत के प्रमुख सॉफ्ट टेनिस खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई। उन्होंने मेंस की टीम और डबल्स इवेंट में मध्य प्रदेश के लिए मेडल जीतने में भी योगदान दिया। उनकी तरक्की का सफर 2025 में भी जारी रहा, जब वह मेंस सिंगल्स में नेशनल चैंपियन बने। हांगझोऊ में हुए 2022 एशियन गेम्स में, मीणा मेंस के सिंगल्स इवेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे और मेंस की टीम प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।
करियर को लगाया चार-चांद
मीणा ने 2025 में एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की। महाद्वीपीय चैंपियनशिप में मेंस के सिंगल्स के सेमीफाइनल में पहुंचकर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर, वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने इस महाद्वीपीय इवेंट में कुल चार मेडल जीते। अब, एशियन गेम्स में मीणा ने अपने करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा है।
क्या है सॉफ्ट टेनिस
यह असल में वैसा ही टेनिस है जैसा हम जानते हैं, लेकिन इसे एक खोखली, मुलायम रबर की गेंद से खेला जाता है। जिसका साइज 6.6 cm और वजन 30-31 ग्राम होता है। यह आम टेनिस बॉल के मुकाबले थोड़ा से अलग है। इसका रैकेट भी अलग होता है। यह हल्का और ज्यादा लचीला होता है और इसके तार कम टेंशन पर कसे होते हैं। कोर्ट का साइज आम टेनिस कोर्ट जितना ही होता है और नेट की ऊंचाई भी कोर्ट की सतह से 1.07 मीटर ही होती है।
इस खेल की शुरुआत 1800 के दशक के आखिर में जापान में हुई थी और बाद में यह पूरे एशिया और पूर्वी यूरोप में फैल गया। इसने 1994 में एशियाई खेलों में अपनी शुरुआत की। सॉफ्ट टेनिस में लॉन टेनिस की तरह 15-30-40 वाला स्कोरिंग सिस्टम नहीं होता है। जो खिलाड़ी या जोड़ी सबसे पहले चार पॉइंट जीतती है, वही गेम जीतती है। 3-3 के स्कोर पर 'ड्यूस' (deuce) की स्थिति बनती है, जिसके बाद गेम जीतने के लिए खिलाड़ी या जोड़ी को लगातार दो पॉइंट जीतने होते हैं। सिंगल्स मैच 'बेस्ट ऑफ सेवन' (सात गेम में से ज्यादातर जीतने वाले) होते हैं, जबकि डबल्स मैच 'बेस्ट ऑफ नाइन' (नौ गेम में से ज्यादातर जीतने वाले) होते हैं।
