स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते 'सुरक्षित करियर' की नई चुनौती खड़ी हो रही है। तब ऐसे समय में मोबाइल पर क्रिकेट खेलने की आदत युवाओं के लिए करियर बनाने और पैसे कमाने का जरिया बनती जा रही है। ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग (GEPL) में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के लिए यह कॉम्पिटिटिव गेमिंग ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा भी बन चुकी है।
ई-स्पोर्ट्स में करियर बना रहे युवा।
जो चीज कभी सिर्फ शौक के तौर पर शुरू हुई थी, वह कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। टूर्नामेंट से होने वाली कमाई और बड़े गेमिंग इकोसिस्टम से मिले मौकों की वजह से खिलाड़ी अपने परिवार की मदद कर पा रहे हैं, अपनी पढ़ाई का खर्च उठा पा रहे हैं। आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी कर पा रहे हैं और कुछ मामलों में, पारंपरिक 'पढ़ाई-लिखाई के बाद नौकरी' वाले रास्ते से हटकर करियर बना पा रहे हैं।
ई-क्रिकेट ने बदली जिंदगी
ई-स्पोर्ट्स कैसे जिंदगियां बदल रहा है, इसकी एक मिसाल कटक के 26 वर्षीय एमबीए ग्रेजुएट कमल किरण परिदा हैं। कमल 'बेंगलुरु बैजर्स' टीम के लिए ई-क्रिकेट खेलते हैं। आज के समय में कमल ने गेमिंग की कमाई से छोटे भाई की पढ़ाई की फीस भरी। यहां तक की नया घर तक खरीद लिया है। वह अपने परिवार का खर्चा उठाने में सक्षम हो गए हैं।
ऐसी ही एक कहानी ओडिशा के रतीकांत साहू की है। वे स्टेट लेवल कबड्डी खिलाड़ी थे, लेकिन घुटने की गंभीर चोट ने उनका करियर हमेशा के लिए खत्म कर दिया। एक दोस्त ने उन्हें मोबाइल पर 'रियल क्रिकेट' खेलने की सलाह दी। उन्होंने ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग के क्वालिफायर में एंट्री ली। अब वह 'चेन्नई फाल्कन्स' टीम के साथ दो बार विजेता बन चुके हैं।
GEPL की प्राइस मनी 3.1 करोड़ रुपए
ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग के तीसरे सीजन का आयोजन पुणे में किया गया। इसमें 64 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसकी कुल प्राइज मनी 3.1 करोड़ रुपए थी। 8 टीमों (पहले 6) के इस टूर्नामेंट में चेन्नई फाल्कन्स ने मुंबई ग्रिजलीज को फाइनल में हराकर सीजन-3 की ट्रॉफी जीती।
टूर्नामेंट इतना टफ है कि क्वालिफाई करने वाले 12 हजार लोगों में से 100 को शॉर्टलिस्ट किया गया और अंततः ऑक्शन में केवल 64 खिलाड़ियों को चुना गया। ये एथलीट इस मुकाम तक पहुंचने के लिए दिन में छह से आठ घंटे कड़ी प्रैक्टिस करते हैं।
एक दिलचस्प विरोधाभास है कि जहां एक ओर एआई पारंपरिक नौकरियों के लिए खतरा बन रहा है, वहीं तकनीक मोबाइल गेमिंग के जरिए नए रोजगार भी पैदा कर रही है। ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग सिर्फ एक घरेलू टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहना चाहती। जमीनी स्तर पर नई प्रतिभाओं को निखारने के लिए कॉलेजों और शहरों में बूट कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। ताकि, ई-स्पोर्ट्स में भारत के खिलाड़ी ओलंपिक मेडल हासिल कर सकें।
एशियन गेम्स में भारतीय ई-स्पोर्ट्स टीम
एशियन गेम्स में भारत की ई-स्पोर्ट्स टीम हिस्सा लेगी। कई इवेंट में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। ई-फुटबॉल से लेकर लीग ऑफ लीजेंड्स, पोकेमॉन यूनाइट और पजल जैसे ई-स्पोर्ट्स में भारतीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय ईस्पोर्ट्स टीम-
चिन्मय साहू (ई-फुटबॉल)
डेनियल शकील पटेल (ई-फुटबॉल)
अहमद शाहिद इसरार (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
राहुल बिष्ट (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
सानिन्ध्य मलिक (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
मिहिर रंजन (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
आकाश शांडिल्य (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
अक्षज शेनॉय (MOBA - लीग ऑफ लीजेंड्स)
अदनान मोहम्मद बादशाह (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
रूबेन गॉडफ्रे फर्नांडीस (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
साई कृष्णा नल्लूरी (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
दीपज्योति लक्ष्मण नाथ (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
रुद्र नारायण नायक (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
दीपकुमार विपुलभाई पटेल (MOBA - पोकेमॉन यूनाइट)
परितोष (पजल - पुयो पुयो चैंपियंस)
