EXPLAINER: ई-क्रिकेट में युवा बना रहे करियर, उठा रहे परिवार का खर्च; देख रहे ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना

'बहुत गेम खेलने लगे हो, फोन रखो और पढ़ाई पर ध्यान दो।' भारतीय परिवार में अक्सर बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलते देख बड़े बुजुर्ग यह सीख देते सुनाई दे जाते हैं। लेकिन आज के समय में मोबाइल पर क्रिकेट खेलने की आदत ही कुछ युवाओं के लिए करियर बनाने और पैसे कमाने का जरिया बन गया है। ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग ने भारत में ई-स्पोर्ट्स का एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर दिया है, जहां युवा टाइमपास नहीं। बल्कि वे इस खेल में अपना करियर बना रहे और ओलंपिक मेडल जीतने का सपना भी देख रहे हैं।

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते 'सुरक्षित करियर' की नई चुनौती खड़ी हो रही है। तब ऐसे समय में मोबाइल पर क्रिकेट खेलने की आदत युवाओं के लिए करियर बनाने और पैसे कमाने का जरिया बनती जा रही है। ग्लोबल ई-क्रिकेट प्रीमियर लीग (GEPL) में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के लिए यह कॉम्पिटिटिव गेमिंग ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा भी बन चुकी है।

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ई-स्पोर्ट्स में करियर बना रहे युवा।

जो चीज कभी सिर्फ शौक के तौर पर शुरू हुई थी, वह कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। टूर्नामेंट से होने वाली कमाई और बड़े गेमिंग इकोसिस्टम से मिले मौकों की वजह से खिलाड़ी अपने परिवार की मदद कर पा रहे हैं, अपनी पढ़ाई का खर्च उठा पा रहे हैं। आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी कर पा रहे हैं और कुछ मामलों में, पारंपरिक 'पढ़ाई-लिखाई के बाद नौकरी' वाले रास्ते से हटकर करियर बना पा रहे हैं।

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