भारत के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने एक बार फिर से पटौदी और एंडरसन-तेंदुलकर की ट्रॉफी का मुद्दा उठाया है। उनका यह सवाल कुछ हद तक जायज भी है। पहले ट्रॉफी का नाम बदलकर एंडरसन-तेंदुलकर कर दिया गया था। विवाद बढ़ने पर इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि जीते हुए कप्तान को पटौदी ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा, लेकिन मामला तब फंसा जब भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैच की सीरीज 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ। इंग्लैंड ने पहला और तीसरा टेस्ट जीता था, जबकि भारत ने दूसरा और पाचवां टेस्ट जीता था जबकि चौथा टेस्ट ड्रॉ रहा था।
एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी विवाद (साभार-X)
गावस्कर ने उठाया अनदेखी करने का मामला
सुनील गावस्कर ने स्पोर्ट्स्टार से बातचीत के दौरान कहा कि प्रेजेंटेशन के समय वहां पटौदी परिवार का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के उस फैसले का कोई मतलब नहीं रहा कि जीतने वाली टीम के कप्तान को पटौदी ट्रॉफी दी जाएगी, क्योंकि सीरीज 2-2 की बराबरी पर खत्म हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि हर बार जब सीरीज बराबरी पर खत्म होगा तो इस मेडल का कोई फायदा नहीं होगा। इससे अच्छा होता कि पटौदी ट्रॉफी मैन ऑफ द सीरीज जीतने वाले खिलाड़ी को दी जाती।
सचिन-एंडरसन को क्यों नहीं बुलाया?
गावस्कर ने सचिन तेंदुलकर और जेम्स एंडरसन को प्रेजेंटेशन सेरेमनी में न बुलाने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा 'एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के नाम से यह पहली सीरीज थी। अच्छा होता कि उन दोनों को इस मौके पर बुलाया जाता। जहां तक मुझे पता था इस सीरीज के दौरान दोनों खिलाड़ी वहां मौजूद भी थे। आखिर उन दोनों को क्यों नहीं बुलाया गया। इसका सीधा मतलब है कि दोनों को बुलाया नहीं गया था।
