बल्ले से दुनिया पर राज करने वाली स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) अब महिला टीम इंडिया की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। एक तरफ उनकी शानदार बैटिंग लेगसी है, दूसरी तरफ अब कैप्टेंसी की जिम्मेदारी। क्रिकेट में कप्तानी सिर्फ टीम का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत को आगे बढ़ाने का नाम है, जिसे पिछली पीढ़ी अपने प्रदर्शन, फैसलों और उपलब्धियों से तैयार करती है। स्मृति मंधाना पर भी हरमनप्रीत कौर की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और चुनौती है।
भारतीय मेंस क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा के बाद शुभमन गिल का दौर इसी बदलाव की कहानी कहता है। अब भारतीय महिला क्रिकेट भी ऐसे ही एक नए मोड़ पर खड़ा है, जहां मिताली राज और हरमनप्रीत कौर के बाद स्मृति मंधाना को टीम की कमान सौंपी गई है। भारतीय महिला टीम की कप्तानी संभालना स्मृति के लिए सिर्फ एक नई भूमिका नहीं, बल्कि उस सफर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, जिसे हरमनप्रीत कौर ने विश्व चैंपियन बनाकर शीर्ष पर पहुंचाया है।
Women WC 2025. Photo- BCCI
कपिल-गांगुली और धोनी ने बनाई नींव
भारतीय मेंस क्रिकेट में कप्तानी की विरासत को समझने के लिए कपिल देव, सौरव गांगुली से होते हुए महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा के योगदान को देखना जरूरी है। कपिल देव ने भारतीय क्रिकेट को बड़े टूर्नामेंट में जीतने का भरोसा दिया। गांगुली ने खिलाड़ियों को बैक करने और उन पर भरोसा करना सिखाया। धोनी ने उस विरासत को आगे बढ़ाया और अपनी कप्तानी में भारत को 2007 का टी20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी दिलाई। उन्होंने एक ऐसी टीम तैयार की, जो दबाव में भी अपने फैसलों पर भरोसा करना सीख गई।
कोहली ने बदली मानसिकता
इसके बाद विराट कोहली ने कप्तानी को एक अलग पहचान दी। उनकी आक्रामकता, फिटनेस पर जोर और टेस्ट क्रिकेट में जीत की भूख ने भारतीय टीम के नजरिए को बदला। कोहली के दौर में भारत ने विदेशी परिस्थितियों में भी मुकाबला करने का आत्मविश्वास हासिल किया। उन्होंने खिलाड़ियों के भीतर यह विश्वास जगाया कि भारतीय टीम सिर्फ घरेलू मैदान पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी हिस्से में जीत सकती है।
रोहित ने दिलाए बड़े खिताब
रोहित शर्मा ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए टीम को बड़े आईसीसी खिताब दिलाए। उनकी कप्तानी में भारत ने 2024 का टी20 विश्व कप और 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती। रोहित के नेतृत्व में अनुभव, खिलाड़ियों को स्वतंत्रता देने और बड़े मुकाबलों में सही रणनीति अपनाने का संतुलन देखने को मिला।
अब शुभमन गिल के सामने इसी विरासत को आगे ले जाने की चुनौती है। वह एक ऐसे दौर में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां उनसे सिर्फ जीत की उम्मीद नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए मजबूत टीम तैयार करने की भी अपेक्षा है। धोनी, कोहली और रोहित ने अपने-अपने तरीके से भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी। गिल के सामने अब अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर है।
2017 women WC. Photo- ICC
मिताली राज ने तैयार किया रास्ता
भारतीय महिला क्रिकेट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, हालांकि यहां परिस्थितियां और चुनौतियां अलग रही हैं। मिताली राज का दौर भारतीय महिला क्रिकेट के लिए आधार तैयार करने वाला समय था। उन्होंने लंबे समय तक टीम का नेतृत्व किया और अपनी बल्लेबाजी तथा निरंतरता से महिला क्रिकेट को पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में भारत ने दो बार (2005 और 2017) वनडे वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया। भले ही टीम खिताब नहीं जीत सकी, लेकिन उनकी टीम ने देश में महिला क्रिकेट के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
हरमनप्रीत ने दिलाया भरोसा
मिताली के बाद हरमनप्रीत कौर ने टीम को एक नई आक्रामक पहचान दी। वह बड़े मुकाबलों में जोखिम लेने और दबाव के बीच टीम को आगे ले जाने वाली कप्तान के रूप में उभरीं। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट ने साल 2025 में वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता। जिसकी नींव सालों पहले मिताली राज ने रखी थी।
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी का सबसे बड़ा महत्व सिर्फ जीत या हार के आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस विश्वास में भी है, जो भारतीय महिला टीम ने दुनिया की मजबूत टीमों के सामने मुकाबला करते हुए हासिल किया। मिताली ने जिस नींव को मजबूत किया, हरमनप्रीत ने उस पर टीम की नई पहचान खड़ी करने का काम किया।
Asian games Women Cricket Gold. Photo- BCCI
अब मंधाना की बारी
अब स्मृति मंधाना के सामने इन दोनों की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। वह ऐसी टीम की कप्तान बनी हैं, जिसके पास अनुभव भी है और युवा प्रतिभाओं की मजबूत फौज भी। स्मृति मंधाना भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे प्रमुख बल्लेबाजों में से एक हैं। 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से लगातार छाप छोड़ी है। वह हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में उप-कप्तान की भूमिका निभा चुकी हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने का अनुभव भी है।
इसके अलावा, महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कप्तानी करते हुए उन्होंने 2024 और 2026 में खिताब जीते। इससे उनके नेतृत्व कौशल और बड़े खिलाड़ियों से सजी टीम को संभालने की क्षमता को मजबूती मिली है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कप्तानी का दबाव फ्रेंचाइजी क्रिकेट से अलग होता है। यहां हर सीरीज के साथ अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं और बड़े टूर्नामेंट में एक छोटी-सी चूक भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बन सकती है। स्मृति के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन और कप्तानी की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की होगी।
विरासत आगे बढ़ाने की चुनौती
उनकी नेतृत्व शैली हरमनप्रीत से अलग हो सकती है। जहां हरमनप्रीत मैदान पर अपने आक्रामक अंदाज के लिए जानी जाती हैं। वहीं स्मृति का शांत स्वभाव और बल्लेबाजी में सहजता उनकी कप्तानी की पहचान बन सकती है। लेकिन किसी भी कप्तान की असली पहचान उसके स्वभाव से ज्यादा इस बात से बनती है कि वह मुश्किल परिस्थितियों में टीम से कैसा प्रदर्शन करवाता है। मिताली राज ने भारतीय महिला क्रिकेट को मजबूत आधार दिया, हरमनप्रीत कौर ने उसे बड़े मंच पर अधिक आक्रामक पहचान दिलाई और अब स्मृति मंधाना के पास इस सफर को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर है।
स्मृति की फुल-टाइम कप्तानी का कार्यकाल जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20 और तीन वनडे मैच की सीरीज से शुरू होगा। इस सीरीज से भारतीय महिला क्रिकेट में एक नए युग का आरंभ होगा। तीन मैचों की टी20 सीरीज 16 अक्टूबर से शुरू होगी। वहीं, वनडे सीरीज 23 अक्टूबर से खेली जाएगी।
