नई दिल्ली: टीम इंडिया के ऑरिजनल लिटिल मास्टर कहे जाने वाले सुनील गावस्कर आज अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। 10 जुलाई, 1949 में जन्में सुनील गावस्कर को भारतीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका साल 1971 में वेस्टइंडीज दौरे पर मिला था। उस दौरे पर गावस्कर को चार टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला और उन्होंने ऐसी धमाकेदार शुरुआत की कि दोबारा पलटकर नहीं देखना पड़ा।
सुनील गावस्कर (साभार ICC)
डेब्यू टेस्ट सीरीज में जमकर मचाया धमाल
गावस्कर ने अपनी डेब्यू सीरीज में खेले 4 मैच की 8 पारियों में तीन बार नाबाद रहते हुए 154.8 के औसत से 774 रन बनाए थे जिसमें एक दोहरे शतक सहित कुल 4 शतक शामिल थे। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 220 रन था। करियर के महज चौथे टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़ने का अनोखा कारनामा भी गावस्कर ने कर दिखाया था। पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट की पहली पारी में गावस्कर ने 124 और दूसरी पारी में 220 रन बनाए थे। टीम इंडिया ने सीरीज का दूसरा और गावस्कर का डेब्यू टेस्ट अपने नाम किया था इसके अलावा सीरीज के बाकी चार मैच ड्रॉ रहे थे।
गावस्कर के सिर पर सजा था जीत का सेहरा
वेस्टइंडीज को उस दौर में उसके घर पर पटखनी देना बड़ी बात थी और टीम की जीत का सेहरा सुनील गावस्कर जैसे युवा खिलाड़ी के सिर पर पर सजा था। गावस्कर के बल्ले के तूफान का असर कैरेबियाई क्रिकेट प्रेमियों के ऊपर पड़ा था। हद तो ये हो गई कि उनकी उपलब्धियों को केंद्र में रखते हुए एक कैलिप्सो सॉन्ग लिखा गया। जिसमें गावस्कर को भारतीय टीम की जीत का हीरो बताया गया था।
तारीफ में लिखा गया था कैलिप्सो सॉन्ग
गावस्कर के लिए गीत में कहा गया, इट वॉज गावस्कर, द रियल मास्टर, जस्ट लाइक अ वॉल, वि कुडंट आउट गावस्कर एट ऑल, नॉट एक ऑल, वी नो वेस्टइंडीज कुडंट आउट गावस्कर एट ऑल।( गावस्कर, जीत के वास्तविक हीरो थे, वो दीवार की तरह डटे रहे, वेस्टइंडीज की टीम उन्हें आउट नहीं कर पाई।
अन्य खिलाड़ियों का भी था गीत में जिक्र
इस गीत में दोनों टीमों के अन्य खिलाड़ियों का भी जिक्र था और उनके प्रदर्शन की तारीफ भी की गई थी। जिन भारतीय खिलाड़ियों का इसमें नाम था वो ईरापल्ली प्रसन्ना, अजीत वाडेकर, वीनू मांकड, गोविंदराज, दुर्रानी, सोलकर, आबिद अली, दिलीप सरदेसाई, गुंडप्पा विश्वनाथ का भी जिक्र था। वेंकटराघवन, बिशन सिंह बेदी, विजय जयसिम्हा, जयंतीलाल को भारतीय टीम की जीत का अहम किरदार बताया।
वेस्टइंडीज की सॉन्ग में की गई थी आलोचना
यह सॉन्ग भारत वेस्टइंडीज सीरीज पर पूरी तरह केंद्रित था जिसमें भारतीय टीम की तारीफ के साथ-साथ मेजबान टीम की कड़ी आलोचना भी की गई थी। भारतीय टीम किसी भी तरह के विकेट पर क्रिकेट खेलने में सक्षम है। उनके शानदार खेल की वजह से वेस्टइंडीज की टीम खराब लगने लगी है। रोहन कन्हाई 158 रन की पारी खेलकर और नॉरिगा 95 रन पर 9 विकेट चटकाकर भी टीम को जीत नहीं दिला पाए। गोविंदराज, सलीम दुर्रानी, दिलीप सरदेसाई और गुंडप्पा विश्वनाथ के सामने तो वेस्टइंडीज के गेंदबाज दोयम दर्जे के नजर आने लगे थे। कप्तान क्लाइव लॉयड को कमान संभालने के लिए और कोचिंग की जरूरत है यहां तक इसमें कह दिया गया था।
बेदी और सोबर्स के पिता बनने का भी है जिक्र
गीत में सीरीज के दौरान बिशन सिंह बेदी के पिता बनने की भी बात कही गई है। वहीं सर गैरी सोबर्स के भी बेटे का पिता बनने की भी जिक्र है। सोबर्स बेटे के जन्म के बाद बगैर खाता खोले पवेलियन लौट गए थे।
