शुक्रवार को जापान के नागोया सिटी मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित एशियाई पैरा गेम्स में भारत के परमोद बिजारनिया ने पुरुषों की 1500 मीटर T46 स्पर्धा के फाइनल में 4:09.65 का समय निकालकर रजत पदक जीता। श्रीलंका के पुवाकपितिकांडे पी. वहुमपुरागे ने 4:03.25 के 'गेम्स रिकॉर्ड' समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जो भारतीय एथलीट से 6.40 सेकंड बेहतर था। हालांकि, परमोद बाकी प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे रहे और पोडियम पर अपनी जगह पक्की की। फिलीपींस के किंग जेम्स रेयेस ने 4:13.81 के अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता। वे विजेता से 10.56 सेकंड पीछे रहे।
परमोद और थुलसिमथी ने एशियाई पैरा खेलों में जीते सिल्वर मेडल (X/DrMansukhmandaviya/Sai_Media)
पैरा-एथलेटिक्स में T46 वर्गीकरण उन एथलीटों के लिए है जो खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और जिनके ऊपरी अंगों (हाथों) में कोई विकलांगता होती है—जैसे कि कोहनी के ऊपर या नीचे से एक हाथ का न होना, या कंधे या कोहनी से जुड़ी कोई गंभीर शारीरिक अक्षमता।
शुक्रवार को 2026 एशियन पैरा गेम्स के 5वें दिन परमोद बिजारनिया के अलावा थुलसिमथी मुरुगेसन और महिला रिकर्व डबल्स जोड़ी भावना और पूजा ने भी भारत के लिए सिल्वर मेडल जीते।
महिला सिंगल्स SU5 फाइनल में थुलसिमथी को चीन की किउक्सिया यांग से 18-21, 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। पैरा आर्चरी में, महिला रिकर्व डबल्स के गोल्ड मेडल मैच में भावना और पूजा को चीन के हाथों 0-6 से हार मिली। वे तीनों सेटों में क्रमशः 31-38, 30-35 और 29-39 से हारीं।
इन तीन सिल्वर मेडल के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 91 हो गई है, जिसमें 21 गोल्ड, 29 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इस खबर को लिखे जाने तक, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर है, जबकि चीन 319 पदकों के साथ सबसे ऊपर है।
थुलसिमथी ने 5 साल की उम्र में एथलेटिक्स शुरू की, फिर बैडिमंटन में किया कमाल
पैरा बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली थुलसिमथी मुरुगेसन 11 अप्रैल 2002 को तमिलनाडु के कांचीपुरम में जन्मीं थीं। पांच साल की उम्र में उन्होंने एथलेटिक्स की शुरुआत की थी और कुछ साल बाद बैडमिंटन खेलना शुरू किया। जन्म से ही उनके बाएं हाथ में एक शारीरिक कमी थी, जिसके कारण उनका अंगूठा नहीं है। इसके अलावा, उन्हें क्रॉनिक अल्नर न्यूराइटिस और मसल एट्रोफी (मांसपेशियों का सूखना) जैसी समस्याएं भी हैं। एक दुर्घटना के कारण उनके बाएं हाथ की हलचल और भी सीमित हो गई।
उनके पिता, डी. मुरुगेसन ने उन्हें ट्रेनिंग देने में पांच साल लगाए और उन्हें पैरा-स्पोर्ट्स से परिचित कराया। उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में 2024 वर्ल्ड चैंपियनशिप में महिला डबल्स का सिल्वर मेडल और 2023 फ़ज़ा दुबई पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल में महिला डबल्स का गोल्ड मेडल शामिल है। उन्होंने 2022 एशियन पैरा गेम्स में भी मेडल जीते थे। 26 वर्षीय प्रमोद ने पुरुषों की 1500 मीटर T46 स्पर्धा में 4:09.65 का समय निकालकर, 2022 हांगझोऊ खेलों की तरह ही इस बार भी रजत पदक जीता।
