What to eat in Bach Baras: बछ बारस के दिन क्या खाएं और क्या नहीं, इसे लेकर कई सवाल रहते हैं। खासकर यह कि क्या इस दिन दूध पी सकते हैं? क्या चाय में दूध डाल सकते हैं? क्या दही, पनीर और घी भी नहीं खाना चाहिए? दरअसल, बछ बारस के खान-पान के नियम सामान्य व्रत से थोड़े अलग हैं।
बछ बारस व्रत में क्या खाना चाहिए, क्या इस व्रत में दूध पीने की मनाही है
बछ बारस को गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। यह पर्व गाय और उसके बछड़े के प्रति सम्मान जताने का दिन है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन गेहूं और गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन न करने की परंपरा है। इनकी जगह बाजरा, मक्का, बेसन, चना, मोठ और मूंग से भोजन बनाया जाता है।
क्या बछ बारस में दूध पी सकते हैं
परंपरा के अनुसार बछ बारस के दिन गाय का दूध नहीं पीना चाहिए। इस दिन गाय के दूध पर उसके बछड़े का अधिकार माना जाता है। इसलिए व्रती महिलाएं गाय का दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं करतीं।
गाय के दूध से बनी इन चीजों को भी खाने से बचना चाहिए:
- गाय के दूध की चाय या कॉफी
- गाय के दूध से बना दही और छाछ
- पनीर और मावा
- मक्खन और घी
- खीर और दूध से बनने वाली मिठाइयां
- दूध वाले बिस्कुट तथा पैकेट बंद खाद्य पदार्थ
हालांकि, कुछ परिवारों में भैंस या बकरी का दूध लेने की अनुमति होती है। ऐसे घरों में भैंस के दूध की चाय, दही या छाछ ली जाती है। वहीं कुछ परिवार बछ बारस पर किसी भी प्रकार के दूध का सेवन नहीं करते। इसलिए अपने घर की परंपरा जानने के बाद ही दूध का प्रयोग करें।
क्या बछ बारस में चाय पी सकते हैं
यदि आप रोज चाय पीती हैं तो बछ बारस पर बिना दूध वाली चाय ले सकती हैं। आप नींबू की चाय, ब्लैक टी या हर्बल टी पी सकती हैं। यदि आपके परिवार की परंपरा में भैंस का दूध मान्य है तो उससे चाय बनाई जा सकती है।
ध्यान रखें कि बाजार में मिलने वाले डेयरी पैकेट पर यह स्पष्ट नहीं होता कि दूध पूरी तरह गाय का है या भैंस का। ऐसी स्थिति में दूध वाली चाय छोड़ना सबसे सरल विकल्प हो सकता है।
बछ बारस में क्या खा सकते हैं
बछ बारस की पारंपरिक थाली बहुत सादी होती है। इसमें गेहूं की रोटी के बजाय बाजरे या मक्के की रोटी बनाई जाती है। इसके साथ अंकुरित मोठ, मूंग, चना या बेसन की कढ़ी खाई जाती है।
क्या बछ बारस में बाजरे की रोटी खा सकते हैं
जी हां, बाजरे की रोटी बछ बारस के पारंपरिक भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों में इसे सोगरा भी कहा जाता है। बाजरे की रोटी को गुड़, बेसन की कढ़ी, चने की दाल या अंकुरित मोठ की सब्जी के साथ खाया जा सकता है।
कुछ परिवार एक दिन पहले ही बाजरे की रोटी बनाकर रख लेते हैं। पूजा के बाद ठंडी रोटी खाने की परंपरा भी कई घरों में है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ परिवार बछ बारस पर चूल्हा नहीं जलाते। यह नियम हर क्षेत्र में लागू नहीं होता, इसलिए अपने परिवार के रीति-रिवाज को प्राथमिकता दें।
क्या बछ बारस में फल खा सकते हैं
बछ बारस पर साबुत फल खाए जा सकते हैं। हालांकि, कई परिवारों में इस दिन चाकू या किसी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं किया जाता। ऐसे में केला, सेब, अमरूद, अंगूर या संतरा साबुत रखा जा सकता है।
यदि घर में चाकू से कटी वस्तु खाने की मनाही है तो फ्रूट सलाद न बनाएं। ऐसा फल चुनें जिसे हाथ से छीला या साबुत खाया जा सके। बच्चों और बुजुर्गों के लिए फल काटना जरूरी हो तो परिवार की मान्यता और उनकी सेहत को ध्यान में रखकर निर्णय लें।
बछ बारस में क्या नहीं खाना चाहिए?
इस दिन आमतौर पर इन चीजों से परहेज किया जाता है:
- गेहूं और उससे बनी रोटी, पूरी, पराठा या बिस्कुट
- गाय का दूध और उससे बने उत्पाद
- चाकू से काटी गई सब्जियां और फल
- प्याज और लहसुन
- मांसाहार और शराब
- बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन
- पैकेट वाले खाद्य पदार्थ जिनमें गेहूं या गाय का दूध मिला हो
चावल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ परिवार बछ बारस पर चावल नहीं खाते, जबकि कुछ स्थानीय परंपराओं में चावल से बनी चीजें भोजन में शामिल की जाती हैं। इसे लेकर घर के बड़े-बुजुर्गों से कुल परंपरा समझ लेना बेहतर होगा।
बछ बारस की आसान पारंपरिक थाली
अगर पहली बार बछ बारस का व्रत रख रही हैं तो बहुत सारे पकवान बनाने की जरूरत नहीं है। आप यह सरल थाली तैयार कर सकती हैं:
- बाजरे की रोटी
- अंकुरित मोठ या मूंग की सब्जी
- बेसन की कढ़ी
- चने की दाल
- थोड़ा गुड़
- साबुत फल
अगर घर में भैंस का दूध मान्य है तो उससे बनी छाछ ली जा सकती है। गाय के दूध का दही या छाछ इस्तेमाल न करें।
बछ बारस का व्रत कैसे खोलें
कई महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को गाय और बछड़े की पूजा करती हैं। कथा सुनने और आरती करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है। कुछ घरों में एक समय भोजन करने का नियम है, जबकि कुछ महिलाएं दिन में फल लेकर शाम को पारंपरिक भोजन करती हैं।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, डायबिटीज के मरीजों या नियमित दवा लेने वालों को निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। शरीर की जरूरत के अनुसार पानी, फल या हल्का भोजन लेते रहें। व्रत का मूल भाव श्रद्धा और करुणा है, खुद को बीमार करना नहीं।
बछ बारस पर गाय का दूध न पीने की परंपरा हमें एक बहुत सहज बात याद दिलाती है- उस दूध पर पहला अधिकार बछड़े का है। इसलिए इस दिन भोजन सादा होता है, लेकिन उसका भाव बहुत खास होता है।
