वट सावित्री व्रत पर क्यों होती है वट वृक्ष की पूजा, जानें क्या है बरगद के पेड़ का महत्व

Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत पर महिलाएं वट वृक्ष की पूजा क्यों करती हैं। जानिए बरगद के पेड़ का धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व, साथ ही सावित्री-सत्यवान कथा से इसका खास संबंध।

Vat Savitri Vrat: भारत में पेड़-पौधों को सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि आस्था और जीवन से जुड़ा माना गया है। इन्हीं में से एक है वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ (vat vriksha)। क्या आप जानते हैं कि वट सावित्री व्रत पर महिलाएं इसी पेड़ की पूजा क्यों करती हैं? आखिर ऐसा क्या खास है इस विशाल वृक्ष में कि इसे अमरता, सौभाग्य और लंबी आयु का प्रतीक माना गया? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वट वृक्ष का संबंध सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और परिवार की स्थिरता से भी जोड़ा जाता है। बता दें कि 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई को शनिवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन वट वृक्ष की पूजा होगी।

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वट वृक्ष को क्यों इतना पवित्र माना जाता है, क्या है इसकी मान्यता

वट वृक्ष को क्यों माना जाता है पवित्र

हिंदू धर्म में वट वृक्ष को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। यही वजह है कि इस पेड़ को अक्षय और दिव्य माना गया है। कहा जाता है कि वट वृक्ष कभी आसानी से सूखता नहीं और इसकी शाखाएं लगातार फैलती रहती हैं। इसी कारण इसे दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक भी माना जाता है।

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