Vat Savitri Vrat 2023 Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत पूजन विधि विस्तार से यहां जानें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 19, 2023, 05:49 PM IST

Vat Savitri Vrat 2023 Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर वट सावित्री व्रत की कथा (Vat Savitri Vrat Katha) सुनती हैं इसके बाद पेड़ की परिक्रमा करते हुए उस पर बांधती हैं। जानिए वट सावित्री व्रत की पूजा विधि (Vat Savitri Vrat Puja Vidhi), व्रत कथा और आरती यहां।

Vat Savitri Vrat 2023 Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला पवित्र व्रत है। इस व्रत को सुहाग की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। हर साल वट सावित्री पूजा ज्येष्ठ अमावस्या (Jyeshtha Amavasya 2023) यानि बड़ अमावस्या (Bad Amavasya 2023) के दिन पड़ती है। इस दिन शनि जयंती (Shani Jayanti 2023) भी मनाई जाती है। वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। साथ ही इस दिन सावित्री माता (Savitri Mata) और सत्यवान की भी पूजा होती है। इस दिन महिलाएं बरगद के पत्तों का हार बनाकर उसे अपने गले में धारण करके वट सावित्री व्रत कथा (Vat Savitri Vrat Katha) सुनती हैं। यहां जानिए वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त (Vat Savitri Vrat Shubh Muhurat) व्रत कथा और आरती।

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Vat Savitri Vrat 2023 Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत पूजा विधि

वट सावित्री व्रत पूजा विधि (Vat Savitri Puja Vidhi)

  • वट सावित्री व्रत पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर नए वस्त्र धारण कर सोलह श्रृंगार करें। संभव हो तो इस दिन पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें।
  • इसके बाद पूजा की सभी सामग्रियों को एक थाली में सजाकर वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ के पास जाएं।
  • अगर आप पहली बार वट सावित्री व्रत रख रही हैं तो कपड़े से बना दुल्हादुल्हन का जोड़ा रखकर पूजा करें।
  • अगर कपड़े का जोड़ा उपलब्ध न हो तो मिट्टी से बने दुल्हा दूल्हन का इस्तेमाल करें।
  • बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री और सत्यवान की तस्वीर रखें।
  • फिर रोली, फल सुपारी, पान, भीगे चने, अक्षत, कलावा, फूल, मिष्ठान और बाकी चीजें बरगद के पेड़ पर अर्पित करें।
  • इसके बाद बांस के पंखे से हवा करें।
  • इसके बाद कच्चा धागा लेकर वृक्ष के 5 से 7 बार परिक्रमा करें।
  • फिर वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री सत्यवान की कथा सुनें।
  • इसके बाद चने का प्रसाद सभी में बाटें।

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