Varalakshmi Vratham 2025: हर साल सावन के महीने में वरलक्ष्मी की पूजा की जाती है। वरलक्ष्मी व्रत को लक्ष्मी के आठ रूप आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी और धान्य लक्ष्मी की पूजा के बराबर माना जाता है। ये व्रत खासतौर से दक्षिण भारत के राज्य जैसे तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में रखी जाती है। इस साल ये पूजा किस दिन है और किस मुहूर्त पर ये पूजा की जाएगी, ये आप यहां से जानें। साथ ही यहां वरलक्ष्मी पूजा की सामग्री लिस्ट का जिक्र है। वरलक्ष्मी की पूजा कैसे करनी है, ये भी यहां बताया गया है।
कब है वरलक्ष्मी व्रत?
द्रिक पंचांग के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत की तिथि 8 अगस्त को सूर्योदय के साथ शुरू हो रही है और 9 अगस्त को सूर्योदय के साथ इसका समापन होगा। इसका मतलब है कि वरलक्ष्मी का व्रत 8 अगस्त को ही रखा जाएगा।
वरलक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त-
- सिंह लग्न (सुबह का मुहूर्त): सुबह 07:15 बजे से 09:17 बजे तक
- वृश्चिक लग्न (दोपहर का मुहूर्त): दोपहर 01:41 बजे से 03:59 बजे तक
- कुंभ लग्न (शाम का मुहूर्त): शाम 07:44 बजे से 09:14 बजे तक
- वृषभ लग्न (मध्यरात्रि का मुहूर्त): रात 12:21
कौन हैं मां वरलक्ष्मी?
देवी वरलक्ष्मी, खुद ही महालक्ष्मी का ही एक रूप हैं। वरलक्ष्मी के अवतरण के बारे में माना जाता है कि वह दूधिया महासागर से प्रकट हुईं थी, जिसे क्षीर सागर के नाम से भी जाना जाता है। इस वजह से उनका रंग उजला है और इसी रंग के वस्त्र भी धारण करती हैं।
वरलक्ष्मी पूजा की सामग्री
- वरलक्ष्मी जी की प्रतिमा
- फूल
- माला
- कुमकुम
- हल्दी
- चंदन पाउडर
- विभूति
- शीशा
- कंघी
- आम पत्र
- पान के पत्ते
- पंचामृत
- दही
- केला
- दूध
- पानी
- अगरबत्ती
- मोली
- धूप
- कपूर
- प्रसाद
- तेल
- दीपक
- अक्षत
वरलक्ष्मी व्रत की पूजन विधि
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई कर लें और स्नान आदि से निवृत्त होकर घर के पूजन स्थल को गंगाजल से साफ कर पवित्र कर लें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। मां वरलक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहना कर जेवर और कुमकुम से सजाएं। इसके बाद एक पाटे पर गणेश जी की मूर्ति के साथ मां लक्ष्मी की मूर्ति को पूर्व दिशा में स्थापित करें और पूजन स्थल पर थोड़ा सा सिंदूर फैलाएं। एक कलश में जल भरकर उसे तांदूल पर रख दें और इसके बाद कलश के चारों तरफ चंदन लगाएं। इस पूजा को दीपावली की पूजा की तरह की किया जाता है। पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें। भोग लगाएं और प्रसाद बांटें।
