Vaishno Devi Temple Mystery: वैष्णो देवी मंदिर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में, त्रिकुटा पहाड़ियों पर, कटरा शहर के पास स्थित है। माता वैष्णो देवी का मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। कटरा से करीब 12 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद माता के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। माता यहां तीन पिंडी स्वरूप में मौजूद हैं। ये पिंडियां प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं। मान्यता है कि माता के इस पिंडी स्वरूप का विशेष महत्व है, जो हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा है। माता के स्वरूप जीवन की मुख्य जरूरतों को पूरा करते हैं। आइए जानते हैं कि इस मंदिर में सिर्फ तीन ही पिंडियां क्यों हैं, आइए जानते हैं कि इसके पीछे का रहस्य क्या है।
क्या है वैष्णो देवी मंदिर की पौराणिक कथा?
ये पिंडियां मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप मानी जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि मंदिर में मूर्ति की जगह सिर्फ तीन पिंडियां ही क्यों? इसके पीछे छिपा रहस्य पौराणिक कथा, आध्यात्मिक महत्व और जीवन के मूल सिद्धांतों से जुड़ा है। आइए विस्तार से समझते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार हंसाली गांव में एक निसंतान ब्राह्मण श्रीधर थे, जो माता दुर्गा के अनन्य भक्त थे। एक बार नवरात्रि में कन्या पूजन के लिए श्रीधर ने गांव की बालिकाओं को आमंत्रित किया। पूजन के बाद सभी कन्याएं चली गईं, लेकिन एक रहस्यमयी कन्या रुक गई। उसने श्रीधर से कहा कि पूरे गांव को भंडारे का निमंत्रण दे दो। गरीब श्रीधर घबरा गए, लेकिन कन्या के आश्वासन पर उन्होंने ऐसा कर दिया। रास्ते में उन्होंने गोरखनाथ के शिष्य भैरवनाथ को भी बुलावा भेजा। भंडारे की शुरुआत में माता की कृपा से भोजन के भंडार लग गए। खुद कन्या रूपी माता ने सभी को प्रसाद बांटना शुरू किया। जब वे भैरवनाथ को भोजन परोसने पहुंचीं तब भैरवनाथ ने उनसे मांस और मदिरा मांगा, जो ब्राह्मण भोजन में असंभव था।
इस पर माता रूपी कन्या ने कहा कि भंडारे में वही मिलेगा, जो वैष्णव भोजन होता है। इस पर भैरवनाथ कन्या को पकड़ने दौड़ा, तो माता वायु रूप धारण कर त्रिकूट पर्वत की ओर उड़ गईं। भैरवनाथ भी उनका पीछा करने लगा। माता ने वहां पर हनुमान जी को बुलाया और उनसे एक गुफा की रक्षा करने का आदेश दिया। इस पर भगवान हनुमान ने उनसे कहा कि मां मुझे प्यास लगी है, जिसपर माता ने बाण चलाया और वहां से गंगा बहने लगीं, जिसे बाणगंगा कहा जाता है। इसके बाद माता गुफा में नौ महीने तपस्या करने चली गईं। इस दौरान भैरवनाथ वहां चला गया और गुफा में प्रवेश करने की कोशिश करने लगा। इस पर हनुमान जी ने उससे युद्ध किया, लेकिन उसका वध नहीं किया।
भैरवनाथ का किया वध
जब माता तपस्या करके बाहर आईं तो उन्होंने भैरवनाथ को युद्ध करते देखा, जिसपर मां ने महाकाली रूप धर भैरवनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया। भैरवनाथ का शीश 8 किमी दूर भैरव घाटी में गिरा।
बिना यहां दर्शन के अधूरी है वैष्णो देवी यात्रा
भैरवनाथ को अपनी गलती का अहसास हुआ और भैरवनाथ ने माता से क्षमा प्रार्थना की। इसके बाद माता ने उन्हें आशीर्वाद दिया, कि जो भी मेरे दर्शन को आएगा, उसकी यात्रा तबतक पूर्ण नहीं मानी जाएगी जब तक वह भैरवनाथ के मंदिर के दर्शन नहीं कर लेता है। इससे भैरवनाथ को माता के चरणों में स्थान मिला।
तीन पिंडियों के रूप में विराजमान हुईं माता
इसके बाद माता तीन पिंडियों के रूप में चट्टान बनकर ध्यानमग्न हो गईं। श्रीधर को सपने में दर्शन हुए और वे पिंडियां खोजकर पूजा करने लगे। उनके वंशज आज भी यह परंपरा निभाते हैं।
क्यों बनीं सिर्फ तीन पिंडियां?
माता वैष्णो देवी तीन पिंडियों में विराजमान हुईं, जिनमें पहली बाईं ओर पिंडी मां काली, दूसरी और बीच वालीं मां लक्ष्मी और सबसे अंतिम वाली मां सरस्वती बनीं। ये तीनों पिंडियां स्वयंभू हैं।
दरअसल मनुष्य का जीवन शक्ति, धन और ज्ञान पर ही आधारित है। बिना इन तीनों के मनुष्य अधूरा है। किसी भी काम को करने के लिए धन की आवश्यकता होती है, लेकिन ज्ञान के बिना धन का सही उपयोग नहीं किया जा सकता है। वहीं, अगर शक्ति नहीं तो व्यक्ति अपनी रक्षा नहीं कर सकता है।
तीन देवों की शक्ति हैं मां
त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश के तीन अलग-अलग काम हैं। इसमें ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता है, जिसके लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है, जिसकी शक्ति मां सरस्वती से मिलती है।
वहीं, भगवान विष्णु पालनहार है, जिसके लिए धन की आवश्यकता होती है। इसके लिए धन की देवी मां लक्ष्मी उनके साथ हैं। भगवान शंकर संहारकर्ता हैं, जिनके लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। इस कारण मां काली उनके साथ रहती हैं।
दर्शन से पूर्ण होता है मनुष्य का जीवन
वैष्णो देवी दर्शन से मनुष्य का दर्शन परिपूर्ण हो जाती है। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से ज्ञान, शक्ति और धन मिलता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
