Surdas Jayanti 2025: सूरदास जयंती पर पढ़ें उनके भक्तिपूर्ण दोहे, जान लें इनका मतलब

  • Authored by: Ritu raj
  • Updated May 2, 2025, 06:46 AM IST

Surdas ke Dohe in Hindi(सूरदास के दोहे हिंदी में): संत सूरदास एक महान कवि तथा संगीतकार थे, जिन्हें मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की भक्ति के लिए जाना जाता है। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को काफी प्रभावित करती हैं। ऐसे में उनकी जयंती पर यहां पढ़ें सूरदास के दोहे।

Surdas ke Dohe in Hindi(सूरदास के दोहे हिंदी में): संत सूरदास, जिन्हें सूर भी कहा जाता है, 15वीं-16वीं शताब्दी के एक महान कवि और संत थे। वे भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपनी भक्ति को मधुर पदों और कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया। उन्हें हिंदी साहित्य के सूर्य के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है कि उनका स्थान कवियों में सबसे ऊंचा है। सूरदास ने अपना पूरा जीवन कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया। उनकी रचनाओं में कृष्ण के बाल रूप, उनकी लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति के विभिन्न पहलुओं का सुंदर और मार्मिक चित्रण मिलता है। सूरसागर उनकी सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें लगभग एक लाख पदों का संग्रह कहा जाता है, हालांकि वर्तमान में लगभग 8,000 पद ही उपलब्ध हैं। इसमें कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन है। ऐसे में जब आज सूरदास जी की जयंती मनाई जा रही है तो यहां उनके कुछ दोहे पढ़ते हैं और जानते हैं क्या है इन दोहों का मतलब।

Surdas dohe

Surdas ke Dohe in Hindi - सूरजास के दोहे हिंदी में

1. जो पै जिय लज्जा नहीं, कहा कहौं सौ बार।

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