Sonam Wangchuk: सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इन दिनों अपने अनशन को लेकर चर्चा में हैं। मीडिया से सोशल मीडिया तक में ये नाम सुर्खियां बटोर रहा है। सोनम वांगचुक 27 सितंबर 2025 से 14 मार्च 2026 तक जोधपुर सेंट्रल जेल में कैद थे। जेल में जब बाहरी दुनिया से उनका लगभग हर संपर्क टूट गया था, तब किताबें ही उनके लिए आत्मबल, चिंतन और प्रेरणा का स्रोत बन गईं।
हाल ही में करीब 6 महीनों के लिए जोधपुर जेल में बंद थे सोनम वांगचुक (AI Generated Image)
सोनम की पत्नी गीतांजलि वांगचुक ने भी सोच-समझकर ऐसी किताबें भेजीं, जो मुश्किल परिस्थितियों में उनका मनोबल बनाए रख सकें। आइए जानते हैं कि जेल के दौरान सोनम वांगचुक ने कौन-सी किताबें पढ़ीं और उनमें ऐसा क्या खास है:
टेल्स ऑफ प्रिजन लाइफ (Tales of Prison Life)
ये किताब श्री अरविंदो के 1908-09 के अलीपुर जेल में बिताए गए समय के अनुभवों पर आधारित है। इसमें वे बताते हैं कि कैसे जेल उनके लिए केवल सजा की जगह नहीं रही, आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागरण और आंतरिक शक्ति को पहचानने का अवसर बन गई।
गीतांजलि ने सबसे पहले यही किताब जेल तक पहुंचाई थी। यह किताब इसलिए चुनी थी ताकि वांगचुक को यह महसूस हो कि इतिहास में कई महान व्यक्तित्व भी जेल की कठिनाइयों से गुजरे हैं और उन्होंने उन्हीं परिस्थितियों में अपने भीतर नई ऊर्जा खोजी। यह किताब मुश्किल समय में मानसिक दृढ़ता का संदेश देती है।
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जोनाथन लिविंग्सटन सीगल (Jonathan Livingston Seagull)
1970 में प्रकाशित अमेरिकी राइटर रिचर्ड बाख की यह किताब एक साधारण सीगल (समुद्री पक्षी) की कहानी है, जो बाकी पक्षियों की तरह सिर्फ भोजन के लिए उड़ना नहीं चाहता। वह अपनी सीमाओं को तोड़कर ऊंची उड़ान भरना चाहता है और जीवन का असली अर्थ खोजने निकल पड़ता है।
यह छोटी-सी किताब स्वतंत्र सोच, आत्मविश्वास और अपने सपनों के पीछे डटे रहने का संदेश देती है। यही वजह है कि दुनिया भर में इसे प्रेरणादायक पुस्तकों की श्रेणी में रखा जाता है। जेल जैसे माहौल में यह किताब व्यक्ति को याद दिलाती है कि शरीर भले सीमित हो, लेकिन विचारों की उड़ान को कोई कैद नहीं कर सकता।
एंट्स: वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड (Ants: Workers of the World)
एकांत कारावास में जब वांगचुक का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग खत्म हो गया, तब उनकी नजर अपनी कोठरी के फर्श पर रेंगती चींटियों पर गई। उनके अनुशासन, मेहनत और सामूहिक जीवन ने उनमें गहरी वैज्ञानिक जिज्ञासा जगा दी।
इसके बाद उन्होंने पत्नी से Eleanor Spicer Rice और Eduard Florin Niga की किताब Ants: Workers of the World मंगवाई। यह किताब चींटियों की दुनिया का वैज्ञानिक परिचय कराती है। इसमें बताया गया है कि अलग-अलग प्रजातियों की चींटियां कैसे रहती हैं, काम करती हैं, संवाद करती हैं और अपने समाज को संगठित रखती हैं।
कहा जाता है कि इस किताब को पढ़ते हुए वांगचुक ने चींटियों के सामूहिक संघर्ष और लद्दाख के लोगों की एकजुटता के बीच समानताएं देखीं। एक छोटी-सी दुनिया ने उन्हें बड़े सामाजिक संघर्षों को नए नजरिए से समझने में मदद की।
मिस्टर गॉड, दिस इज अन्ना (Mister God, This Is Anna)
राइटर फिन की ये किताब एक छोटी बच्ची अन्ना और उसके जीवन से जुड़े अनुभवों पर आधारित है। लेखक ईश्वर, प्रेम, मासूमियत, विश्वास और जीवन के गहरे सवालों को बेहद सरल भाषा में सामने रखते हैं। यह किताब बताती है कि बड़े जीवन-सत्य समझने के लिए हमेशा बड़ी उम्र या बड़ी डिग्री की जरूरत नहीं होती।
दुनिया भर में इस किताब को आध्यात्मिक और प्रेरणादायक साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। कठिन समय में यह पाठक को भीतर झांकने और जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करती है।
शायद यही किताबों की सबसे बड़ी ताकत है। वे परिस्थितियां नहीं बदलतीं, लेकिन इंसान का नजरिया जरूर बदल देती हैं। और कई बार, सबसे कठिन लड़ाई जीतने के लिए यही बदलाव सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
