श्रावण मास की कथा: सावन मास का महात्म्य क्या है, जानें महादेव के विषपान से पार्वती की तपस्या तक की कहानी

Sawan (Shravan) Month katha: श्रावण मास भगवान शिव को क्यों प्रिय है और सावन में जलाभिषेक क्यों किया जाता है? जानें शिव के विषपान, नीलकंठ स्वरूप और माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी पौराणिक कथा।

Sawan (Shravan) Month katha: श्रावण मास आते ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक शुरू हो जाता है और चारों ओर हर-हर महादेव का जयकारा सुनाई देने लगता है। लेकिन सावन में शिव को जल क्यों चढ़ाया जाता है और सोमवार का व्रत क्यों रखा जाता है? इन परंपराओं के पीछे समुद्र मंथन में शिव के विषपान और माता पार्वती की कठिन तपस्या की पौराणिक कथाएं हैं। आइए, सरल शब्दों में जानते हैं श्रावण मास की पूरी कहानी।

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श्रावण मास की कथा, क्या है सावन महीने की पौराणिक कहानी

समुद्र मंथन से शुरू होती है सावन की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवराज इंद्र को एक दिव्य माला भेंट की, जिसे इंद्र ने अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया। ऐरावत ने माला सूंड से उतारकर भूमि पर फेंक दी और चलते हुए उसे पैरों से रौंद दिया। इस अनादर से क्रोधित महर्षि दुर्वासा ने इंद्र सहित सभी देवताओं को शक्तिहीन होने का श्राप दे दिया।

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