Shitala Satam Vrat Katha: शीतला सातम व्रत कथा, हर गर्भवती माता को सुननी चाहिए बूढ़ी सास और बहुओं की कहानी

Shitala Satam Vrat Katha (शीतला सातम व्रत कथा): शीतला सातम एक पारंपरिक हिन्दू त्योहार है, जो मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्योहार शीतला माता को समर्पित होता है। यहां से आप शीतला सातम की व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

Shitala Satam Vrat Katha (शीतला सातम व्रत कथा): शीतला सातम भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। ये आमतौर पर रक्षाबंधन के बाद आता है। ये त्योहार श्रावण पूर्णिमा के बाद आने वाली सप्तमी को पड़ता है। इस दिन लोग एक दिन पहले बना हुआ ठंडा खाना (बैसाणु/बासी भोजन) खाते हैं, क्योंकि माना जाता है कि अग्नि का प्रयोग वर्जित है। कई जगहों पर नीम के पत्तों से पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत भी रखती हैं और अपने परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं। शीतला सातम का व्रत बिना कथा के पूरा नहीं माना जाता है। यहां पढ़ें शीतला सातम की व्रत कथा।

शीतला सातम व्रत कथा (photo source: canva)

शीतला सातम व्रत कथा हिंदी में (Sheetala Saptami Vrat Katha In Hindi) -

बहुत समय पहले की बात है, एक बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा था। लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह उठकर ताज़ा खाना बना लिया और जब इस बारे में सास को पता चला, तो वह अपनी बहुओं पर बहुत गुस्सा हुई, क्योंकि इस दिन बासी भोग चढ़ाने और खाने की परंपरा है।

End of Feed