आज नवरात्रि का कौन सा दिन है, 30 सितंबर को महाअष्टमी है या महानवमी (Navratri Day Today 30 September): आज शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है और नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी दुर्गा मां का आठवां स्वरूप हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि माता की स्वरूप कैसा है और इस दिन का रंग क्या है। साथ ही यहां से आप महागौरी की पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती भी देख सकते हैं।
मां महागौरी का स्वरूप कैसा है?
मां महागौरी का वर्ण गौर है। मां की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी जाती है। मां के सभी वस्त्र और आभूषण सफेद हैं। मान्यता है कि अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी मां की आयु 8 वर्ष की मानी गई है। यही कारण है कि इन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। मां की 4 भुजाएं हैं। मां के ऊपर वाला दाया हाथ अभय मुद्र में है। मां के नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला बायां हाथ वर मुद्रा में है। मां का वाहन वृषभ है। अत: मां को वृषारूढ़ा भी कहा गया है।
नवरात्र के आठवें दिन का रंग कौन सा है?
महागौरी को सफेद रंग प्रिय है, लेकिन इस दिन आप गुलाबी रंग भी पहन सकते हैं।
महागौरी माता की पूजा विधि
- अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
- मां महागौरी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद मां को सफेद रंग के वस्त्र पहनाएं।
- इसके बाद मां को सफेद फूल अर्पित करें। इसके साथ ही कुमकुम से तिलक करें।
- इन सब के बाद मां महागौरी के मंत्रों के जप करें।
- मां को नारियर से बनी मिठाई, हलवे और काले चने का भोग लगाएं।
- इसके पश्चात अंत में मां महागौरी की आरती उतारें।
महागौरी माता का मंत्र
-सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
-हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया, तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकांतां सुदुर्लभाम्।
-श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
महागौरी माता की कथा
मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी को लेकर दो पौराणिक कथाएं काफी प्रचलित हैं। पहली पौराणिक कथा के अनुसार पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के बाद मां पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। तपस्या करते समय माता हजारों वर्षों तक निराहार रही थी, जिसके कारण माता का शरीर काला पड़ गया था। वहीं माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और माता के शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर अत्यंत कांतिमय बना दिया, माता का रूप गौरवर्ण हो गया। जिसके बाद माता पार्वती के इस स्वरूप को महागौरी कहा गया।
दूसरी पौराणिक कथा
वहीं दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार कालरात्रि के रूप में सभी राक्षसों का वध करने के बाद भोलनाथ ने देवी पार्वती को मां काली कहकर चिढ़ाया था। माता ने उत्तेजित होकर अपनी त्वचा को पाने के लिए कई दिनों तक कड़ी तपस्या की और ब्रह्मा जी को अर्घ्य दिया। देवी पार्वती से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने हिमालय के मानसरोवर नदी में स्नान करने की सलाह दी। ब्रह्मा जी के सलाह को मानते हुए मां पार्वती ने मानसरोवर में स्नान किया। इस नदी में स्नान करने के बाद माता का स्वरूप गौरवर्ण हो गया। इसलिए माता के इस स्वरूप को महागौरी कहा गया। आपको बता दें मां पार्वती ही देवी भगवती का स्वरूप हैं।
महागौरी माता की आरती
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती 'सत' हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
