Shani Ka Prakop: शनि को न्याय का देवता और न्यायाधीश कहा जाता है। माना जाता है कि, अगर ये प्रसन्न हो जाएं तो रंक को भी राजा बना दें, वहीं शनि नाराज हो जाएं तो जीवन को जहन्नुम बनने में भी देर नहीं लगती है। इसलिए शनि को हमेशा प्रसन्न रखना बहुत जरूरी है। भूलकर भी ऐसे कार्य नहीं करने चाहिए, जिससे शनि देव नाराज हो जाएं। बीते सप्ताह शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ को छोड़कर अस्त हो चुके हैं। इस स्थिति में शनि नाराज मुद्रा में रहते हैं। इसलिए कहा जाता है कि ऐसे समय में कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे शनि देव की नाराजगी और बढ़ जाए। उन सभी कार्य को करना बंद कर देना चाहिए जो शनि को नापसंद हो। आइए जानते हैं कि ऐसे समय में कौन-कौन से कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
इन गलतियां से शनि देव रहते हैं नाराज, जीवन भर भुगतेंगे कष्ट
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पैर घसीटकर चलने वाले लोगों को शनि देव नापसंद करते हैं। ऐसा करने वाले लोगों को शनि हमेशा परेशान करते हैं। ऐसे जातक कोई भी शुभ कार्य कर लें, लेकिन उसका फल अशुभ ही मिलता है। ऐसे लोगों को हमेशा पैसों की तंगी रहती है। साथ ही कई तरह की अन्य समस्याएं भी इन्हें घेरे रहती हैं। इसी तरह बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत भी शनि को नाराज कर सकती है। इस आदत से नाराज शनि कई तरह की मानसिक समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो लोग ऐसे समय में ब्याज पर पैसा देकर सूद ऐंठते हैं। उनसे भी शनि देव नाराज रहते हैं और कभी बख्शते नहीं हैं। ऐसे जातकों पर शनि की हमेशा टेढ़ी नजर रहती है और भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। शनि इन्हें इनके सही-गलत कार्मों के अनुसार सजा देते हैं।
- ज्योतिष के अनुसार, जो जातक अपने घर, किचन और बाथरूम को गंदा रखते हैं। उन्हें शनि के साथ-साथ राहु का प्रकोप भी झेलना पड़ता है। ऐसे लोगों को किसी कार्य में सफलता नहीं मिलती। साथ ही घर में पड़ा धन भी खत्म होने लगता है। ऐसे जातकों को भारी धन हानि का सामना करना पड़ता है।
- शनि देव को सफाई बहुत पसंद है। इसलिए गंदगी फैलाने वाले लोगों पर कभी भी शनि देव की कृपा नहीं पड़ती। ऐसे लोगों को शनि से सिर्फ सजा ही मिलती है। शनि देवा ऐसे इन जातकों को हमेशा कर्मफल में शारीरिक कष्ट, बीमारी, आर्थिक तंगी और असफलता ही देते हैं। ऐसे लोगों को कड़ी मेहनत करने के बाद भी अच्छा फल नहीं मिलता है। इसलिए भूलकर भी गंदगी न फैलाएं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
