Who is Shaligram : शालीग्राम भगवान कौन हैं? जानिए इनकी पूजा विधि और घर में रखने के लाभ

Who is Shaligram Bhagwan: सनातन धर्म में भगवान शालीग्राम की पूजा का खास महत्व है। तुलसी विवाह के दिन तुलसी माता और शालीग्राम जी का विवाह कराया जाता है। आइए जानते हैं कौन हैं शालीग्राम भगवान।

Who is Shaligram Bhagwan: हिंदू धर्म में भगवान शालीग्राम को भगवान विष्णु का विग्रह और निराकार रूप माना जाता है। भगवान शालीग्राम को कोई आकार नहीं होता है। इनका आकार काले रंग के गोल पत्थर का होता है। पौराणिक कथा के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन शालीग्राम भगवान और तुलसी माता का विवाह कराया जाता है। घर में शालीग्राम की पूजा नियमपूर्वक करने से साधक पर भगवान विष्णु की असीम कृपा बनी रहती है। भगवान शालीग्राम की पूजा करने से सुख, समृद्धि भी आती है। आइए जानते हैं कौन हैं भगवान शालीग्राम और इनकी पूजा विधि के बारे में।

Who is Shaligram Bhagwan (कौन हैं शालीग्राम भगवान)

पद्मपुराण में भगवान शालीग्राम के रूप का वर्णन मिलता है। शालीग्राम भगवान को भगवान विष्णु का निराकार और विग्रह रूप माना जाता है। शालीग्राम पत्थर नेपाल के गंडक नदी तल के भीतर पाया जाता ह। इसी स्थान पर सालग्राम नामक मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के इस रूप की पूजा की जाती है। वहीं से इस पत्थर का नाम शालीग्राम पड़ा। पुराण के 33 तरह के शालीग्राम के रूप का वर्णन किया गया है। इन अवतारों में से 24 अवतार भगवान विष्णु के 24 अवतार माने जाते हैं। यदि भगवान शालीग्राम के पत्थर का आकार गोल होता है तो ये गोपाल रूप माना जाता है। यदि वहीं मछली का आकार होता है तो शालीग्राम भगवान का ये मत्स्य अवतार का प्रतीक माना जाता है।

Shaligram Bhagwan Puja Vidhi (शालीग्राम पूजा विधि)

  • शालीग्राम की पूजा करने से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • फिर भगवान शालीग्राम को पंचामृत से स्नान कराएं और पीला चंदन लगाएं।
  • भगवान शालीग्राम के समक्ष घी का दीपक जलाएं और तुलसी दल अर्पित करें।
  • विधिवत पूजा करने के बाद भगवान शालीग्राम की आरती करें और भोग लगाएं।

End of Feed