Sakat Chauth Today (चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि, मंत्र, तरीका, सकट चौथ पूजा कहानी) Chand ko Arghya Dene ki Puja Vidhi, Mantra, Tarika, Samay: सकट चौथ का व्रत संतान की रक्षा, लंबी उम्र और सुख की कामना से रखा जाता है। इस दिन शाम को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने की परंपरा बहुत महत्वपूर्ण है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्रत पूरा होता है और फल प्राप्त होता है। सकट चौथ पर चंद्रमा निकलने पर दूध या पानी से अर्घ्य दिया जाता है। यह प्रक्रिया भावनात्मक शांति और परिवार सुख देती है। आइए जानते हैं सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का सही समय और विधि क्या है?
कैसे दें चंद्रमा को अर्घ्य
सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का क्या है महत्व?
सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा इसलिए है क्योंकि चंद्रमा मन, भावनाओं और परिवार के कारक हैं। मान्यता है कि चंद्र दर्शन से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। चंद्रमा शिव जी के मस्तक पर भी विराजमान हैं, इसलिए उनका अर्घ्य भगवान शिव और गणेश को प्रसन्न करता है। इससे संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। कई कथाओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने से सकट माता प्रसन्न होती हैं।
सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का क्या है समय?
सकट चौथ पर अर्घ्य चंद्र उदय के समय दिया जाता है। आज 6 जनवरी 2026 को चंद्रोदय का टाइम शाम 8 बजकर 54 है, लेकिन चंद्रमा दिखने का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। पूजा के बाद जैसे ही चंद्र दिखे, अर्घ्य दें। अगर बादल हैं तो अनुमानित समय पर ही कर सकते हैं। अर्घ्य चंद्रमा के उदय के तुरंत बाद करना शुभ माना जाता है।
सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि सरल है। इसे छत या खुले स्थान से करें। इसके लिए एक तांबे या चांदी का लोटा लें। इसमें दूध या पानी भरें। दूध में थोड़ा सा गुड़ या चीनी मिला सकते हैं। हाथ में रोली, चावल और तिल रखें। पूजा थाली में धूपबत्ती, दीपक और फल रखें।
शाम को चंद्र निकलने से पहले गणेश जी और सकट माता की पूजा पूरी करें, फिर चंद्र दर्शन के लिए तैयार हो जाएं। मन में संतान की रक्षा की कामना करें। जैसे ही चंद्रमा दिखे, उसकी तरफ मुंह करके खड़े हों। हाथ जोड़कर चंद्रमा का ध्यान करें।
अर्घ्य दें: लोटे से चंद्रमा की तरफ थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालें।
पूरी तरह से लोटा खाली न करें, बस 1/4 या आधा पानी डालें। बाकी पानी को प्रसाद के रूप में रखें। जल डालते समय ‘ॐ चंद्राय नमः’ या ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ जपें। अंत में चंद्रमा की आरती करें, फिर प्रसाद बांटें। व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोल सकती हैं।
