Ghar Me Laddu Gopal Rakhne Ke Niyam: अधिकतर लोग अपने घरों में भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप लड्डू गोपाल के विग्रह को घर में स्थापित करते हैं। वहीं, कुछ लोग एक से दो विग्रह भी स्थापित करते हैं। हालांकि वे उनकी सेवा से अनजान रहते हैं औप पाप के भागीदार बनते हैं। दरअसल शास्त्रों में घर के अंदर लड्डू गोपाल के विग्रह को स्थापित करने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। आइए जानते हैं कि क्या घर में एक से अधिक लड्डू गोपाल के विग्रह स्थापित कर सकते हैं और अगर हां तो इसके नियम क्या हैं?
क्या एक से अधिक लड्डू गोपाल घर में रख सकते हैं?
पद्म पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, हरिभक्ति-विलास, गोपाल-तापनी उपनिषद जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में घर में एक से अधिक लड्डू गोपाल या ठाकुरजी रखने पर कोई स्पष्ट निषेध नहीं है। गौडीय वैष्णव और पुष्टिमार्ग दोनों संप्रदायों में एक से अधिक स्वरूपों की सेवा की पूरी व्यवस्था है। वृंदावन, श्री नाथद्वारा, मायापुर, बरसाना और द्वारका के हजारों घरों-मंदिरों में पांच-दस और कभी-कभी उससे भी अधिक लड्डू गोपाल की अलग-अलग सेवा सदियों से चल रही है।
इस्कॉन के बड़े मंदिरों में तो एक साथ सैकड़ों छोटे-बड़े ठाकुरजी की सेवा होती है। इस कारण शुद्ध शास्त्रीय दृष्टि से दो या अधिक लड्डू गोपाल रखने में कोई पाप या दोष नहीं है। हालांकि उनकी सेवा आपको बराबर करनी होती है। मतलब अगर एक लड्डू गोपाल के विग्रह को जो भोग रखा है, आप दूसरे विग्रह को उसी में शामिल न करें। दूसरे विग्रह को अलग से भोग लगाएं। इसके साथ ही उनको अलग नाम भी दें।
गृहस्थों को पालन करने चाहिए ये नियम
वास्तु शास्त्र और अधिकांश ज्योतिषाचार्यों की राय है कि घर के पूजा-स्थान में एक ही देवता की एक ही मूर्ति रखना सबसे उत्तम होता है। इससे मन एकाग्र रहता है और पूजा का पूरा फल मिलता है। यदि फिर भी दो मूर्तियां रखनी हों तो उन्हें अलग-अलग स्वरूप मानकर ही रखें। जैसे एक को लड्डू गोपाल और दूसरे को बाल-बलराम या बाल गोपाल, गोपाल, कान्हा, लाला आदि समझें। इसमें इस बात का ध्यान रखें कि सभी मूर्तियां एक ही आकार की न हों।
दो या अधिक विग्रह रखने पर अपनाएं ये नियम
जो भक्त दो या अधिक लड्डू गोपाल रखते हैं, उनके लिए वैष्णव संप्रदायों के नियम बहुत सख्त हैं। हर मूर्ति का अलग नाम हो, अलग स्नान, अलग वस्त्र-शृंगार, अलग थाली में भोग, अलग पलंग या झूले में शयन और घर कभी खाली न छोड़ने का नियम सभी संप्रदायों गौडीय, पुष्टिमार्ग, राधावल्लभ, निम्बार्क में समान रूप से लागू होता है। इन नियमों का पालन न कर पाने पर सेवा में लापरवाही मानी जाती है।
सेवा में कमी हो तो क्या करें?
यदि नियमों का पालन करना संभव न हो और सेवा में कमी हो रही हो तो अतिरिक्त मूर्तियों को वृंदावन, बांकेबिहारी, राधावल्लभ, द्वारका या किसी विश्वसनीय मंदिर में दान कर देना चाहिए या किसी ऐसे भक्त को सौंप देना चाहिए जो पूरी निष्ठा से सेवा कर सके। मूर्ति को कभी जल में विसर्जित करना या फेंकना पूर्णतया वर्जित होता है।
क्या है सही?
नई सेवा शुरू कर रहे हैं तो केवल एक लड्डू गोपाल ही रखें। इससे भक्ति गहरी और सेवा सरल रहेगी। पहले से दो या अधिक हैं और आप पूरे नियमों से अलग-अलग सेवा कर सकते हैं तो कोई दोष नहीं, पुण्य ही बढ़ेगा। सेवा में कमी हो रही है तो अतिरिक्त मूर्तियों का सम्मानपूर्वक दान कर देना श्रेष्ठ है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
