खजूर से क्यों खोला जाता है रोजा, जानिए क्या है इसके पीछे का मुख्य कारण

रमजान के पाक महीने में लोग अल्लाह की इबादत करने के साथ ही रोजा भी रखते हैं। रोजा सुबह सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जाता है। इसके बाद रोजा इफ्तार किया जाता है। रोजा अधिकतर खजूर से खोला जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खजूर से ही रोजा क्यों खोला जाता है। अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि खजूर से रोजा खोलने के पीछे का क्या कारण है?

अभी रमजान का पाक महीना इन दिनों चल रहा है। आज यानी 10 मार्च 2026 से रमजान का तीसरा अशरा भी शुरू हो गया है। इस आखिरी अशरे को जहन्नुम से मुक्ति का समय माना जाता है। इस दौरान मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से माफी मांगते हैं। रमजान में रोजेदार पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के बाद सूर्यास्त के समय इफ्तार करते हैं और दुनिया भर में एक परंपरा लगभग हर जगह देखने को मिलती है कि रोजा सबसे पहले खजूर खाकर ही खोला जाता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर रोजा खजूर से ही क्यों खोला जाता है और पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किस तरह से इफ्तार करते थे।

खजूर से क्यों खोला जाता है रोजा

खजूर से क्यों खोला जाता है रोजा?

पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत है खजूर से इफ्तार करना

इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा खजूर से खोलना पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत माना जाता है। हदीस की किताब सुनन अबू दाऊद में बताया गया है कि पैगंबर इफ्तार के समय पहले ताजे खजूर खाते थे। अगर ताजे खजूर उपलब्ध न होते तो सूखे खजूर से रोजा खोलते थे। अगर खजूर भी न मिले तो पानी से रोजा खोलना भी सही बताया गया है। इसी वजह से मुसलमानों के बीच इफ्तार की शुरुआत खजूर से करना एक अहम परंपरा बन गई है।

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