भाई दूज (Bhai Dooj) और रक्षा बंधन ये दोनों ही त्योहार भाई-बहन से जुड़े होते हैं। रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है तो भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को। ये दोनों ही त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित हैं। लेकिन फिर भी इनमें कुछ अंतर है। तो चलिए आपको बताते हैं कि भाई दूज और रक्षा बंधन के त्योहार में क्या फर्क है।
भाई दूज और रक्षा बंधन में अंतर?
भाई दूज और रक्षा बंधन में अंतर (Differnce Between Raksha Bandha And Bhai Dooj)
- धार्मिक मान्यताओं अनुसार रक्षा बंधन की शुरुआत इंद्र देव, राजा बली और भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा हुई थी। वहीं भाई दूज की शुरुआत यमराज और उनकी बहन यमुना द्वारा हुई थी।
- यही कारण है कि रक्षा बंधन के दिन लोग राजा बली की कथा सुनते हैं और भाई दूज के दिन यमराज और यमुना की।
- रक्षा बंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी यानी पवित्र धागा बांधती हैं और भाई अपनी बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। भाई दूज पर बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और कई जगह इस दिन भाई को सूखा नारियल देने की भी परंपरा है।
- आमतौर पर यदि बहन विवाहित हो तो वो अपने भाई के घर जाकर रक्षा बंधन मानती है लेकिन भाई दूज में भाई अपनी बहन के घर जाकर भाई दूज मनाता है।
- भाई दूज के दिन यमराज और यमुना नदी की पूजा की जाती है। इस दिन भाई और बहन यमुना नदी में स्नान करते हैं। रक्षा बंधन के दिन ऐसी कोई मान्यता नहीं है।
- रक्षा बंधन पर बहन राखी बांधने के पश्चात अपने भाई को मिठाई खिलाती हैं। भाई दूज पर बहनें अपने भाई को भोजन खिलाने के बाद पान खाने को देती हैं। ऐसी मान्यता है कि भाई दूज के दिन यदि बहन अपने भाई को पान खिलाती हैं तो उन्हें पुण्य मिलता है।
- भाई दूज में आरती और टीका महत्वपूर्ण होता है जबकि रक्षा बंधन राखी बांधने का विशेष महत्व माना गया है।
- रक्षा बंधन पर भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं, जबकि भाई दूज में बहन अपने भाई की रक्षा करने का संकल्प लेती हैं।
