Putrada Ekadashi 2025: हर वर्ष दो बार पुत्रदा एकादशी आती है। एक बार पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर जिसे पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। और फिर दूसरी बार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे इसे श्रावण पुत्रदा एकादशी कहते हैं। इस साल सावन की पुत्रदा एकादशी कब है, इसकी तिथि को लेकर थोड़ी कंफ्यूजन है। यहां से आपको पुत्रदा एकादशी की सही तारीख के साथ शुभ मुहूर्त, पूजा की सामग्री लिस्ट, पूजा की विधि, कथा समेत आरती भी मिल जाएगी।
पुत्रदा एकादशी तिथि और पूजा मुहूर्त 2025 (Putrada Ekadashi 2025 Tithi And Muhurat)
सावन मास के पुत्रदा एकादशी साल 2025 में 5 अगस्त, दिन मंगलवार को मनाई जाएगी।
- एकादशी तिथि प्रारम्भ- 4 अगस्त 2025 की सुबह 11.42 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त- 5 जनवरी 2025 को दोपहर 1.13 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4.20 से 5.02 बजे
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से 12.54 बजे
- पुत्रदा एकादशी पारण समय- 2025 07:15 से 08:21
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 08:21
पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री (Putrada Ekadashi 2025 Puja Samagri)
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर
- एक लकड़ी का चौकी
- बिछाने के लिए पीले वस्त्र
- बैठने के लिए आसन
- शुद्ध जल या गंगाजल
- पीले वस्त्र
- पीले फूल
- तुलसी दल
- पीले फल
- मिठाई
- दीपक
- धूप
- माचिस
- घी
- आरती
- व्रत कथा की पुस्तक
पुत्रदा एकादशी व्रत विधि (Putrada Ekadashi 2025 Vrat Vidhi)
पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को व्रत से एक दिन पहले एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इसके अलावा व्रती को संयमित और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सबसे पहले व्रत वाले दिन प्रातःकाल उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान का ध्यान करें। शंख में जल लेकर प्रतिमा का अभिषेक करें। भगवान विष्णु को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद चावल, फूल, इत्र, अबीर, गुलाल आदि से भगवान की विधि विधान पूजा करें और उनकी प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। भगवान को पीले वस्त्र अर्पित करें। भगवान को मौसमी फल का भोग लगाएं। इसके बाद खीर का भोग लगाएं। इसके बाद पुत्रदा एकादशी की कथा सुनें और साथ ही श्री हरि विष्णु भगवान की आरती करें। ये व्रत निर्जला रखा जाता है लेकिन अगर बिना पानी के व्रत रख पाना संभव न हो तो संध्या काल में दीपदान के पश्चात फलाहार कर सकते हैं। व्रत के अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति को भोजन कराकर ही व्रत का पारण करना चाहिए।
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Putrada Ekadashi 2025 Vrat Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रावती नाम की एक नगरी में सुकेतुमान नामक राजा राज्य करता था, जिनकी पत्नी का नाम शैव्या था। राजा-रानी निःसंतान होने के कारण सदैव चिन्तित रहते थे, तमाम ऐश्वर्य भी उनके इस दुख के आगे छोटा दिखता था, उसे हमेशा यही चिंता रहती थी कि अब उसके बाद उसका राज-पाट कौन संभालेगा और उसकी मृत्युपरांत उसका अंतिम संस्कार, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म कौन करेगा, कौन उसे मुक्ति दिलाएगा और कौन उसके पितरो को भी तृप्त करेगा? बस यही सब सोच कर राजा की तबियत भी खराब रहने लगी। एक समय तो राजा ने अपने शरीर को त्याग देने का निश्चय किया परंतु आत्मघात को महान पाप समझकर उसने ऐसा नहीं किया। एक दिन राजा ऐसा ही विचार करता हुआ अपने घोड़े पर चढ़कर वन को चल दिया, वहां जाकर प्रकृति की सुंदरता को देखने लगा, वहां उसने देखा कि कैसे हिरण, मोर एवं अन्य पशु पक्षी भी अपनी-अपनी पत्नियों, बच्चों सहित विचरण कर ज़िन्दगी का आनंद ले रहे थे। यह देखकर उसका मन और अशांत हो उठा और उसने सोचा कि इतने पुण्यकर्म करने के बाद, इतने अनुष्ठान, यज्ञ होम आदि करके भी उसे यह निःसंतान होने का दुख क्यों सहना पड़ रहा है? तभी राजा को प्यास लगी और वह जल की तलाश में इधर उधर भटकने लगा, भटकते-भटकते उसकी नज़र एक सुंदर सरोवर के किनारे बने ऋषि-मुनियों के आश्रम पर पड़ी। श्रद्धावान होने के कारण राजा ने वहां जाकर सभी ऋषियों को दंडवत प्रणाम किया। राजा का सरल स्वभाव देख सभी ऋषि उससे प्रसन्न होकर उससे कुछ मांगने के लिए बोले। जिसपर राजा ने उत्तर दिया, “हे देव! भगवान की और आप संत महात्माओं की कृपा से मेरे पास सब कुछ है, केवल कोई संतान नहीं है, जिसके कारण मेरा जीवन लक्ष्यहीन प्रतीत होता है। यह सुन ऋषि बोले, “राजन! भगवान ने ही आज कृपा करके तुम्हें भेजा है, आज पुत्रदा एकादशी है, आप पूरी निष्ठा से आज का व्रत करें ऐसा करने से आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।” भूदेवों की यह वाणी सुन राजा ने उसका पालन किया, उसने पूर्ण निष्ठा से एकादशी का व्रत कर श्रीहरि का पूजन कर, दान पुण्य कर, द्वादशी को नियमानुसार पारण कर व्रत खोला।इसके फल स्वरूप कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुईं और अंत में उसने एक तेजस्वी, यशस्वी, ओजस्वी बालक को जन्म दिया। इस प्रकार सभी सुखों को भोग, अंत में राजा को मोक्ष भी प्राप्त हुआ।
पुत्रदा एकादशी की आरती (Putrada Ekadashi 2025 Aarti)
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।
