Puja ke Niyam: हर पूजा में क्यों अनिवार्य रूप से रखा जाता है अक्षत, जानें क्या है इसकी मान्यता

Puja ke Niyam: अक्षत यानी बिना टूटे चावल हर पूजा में शुभता और पूर्णता का प्रतीक माने जाते हैं। यह देवताओं को समर्पित हमारी अखंड श्रद्धा और समृद्धि की कामना का संकेत होते हैं। अक्षत को अर्पित करना हर धार्मिक अनुष्ठान में अनिवार्य माना गया है। जानें इसके बारे में।

Puja ke Niyam: भोलेनाथ का प्रिय श्रावण मास 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। यूं तो भोलेनाथ जल, बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं, मगर कुछ पूजन सामग्रियों का उनकी पूजा में विशेष स्थान है। पूजा-अर्चना में अक्षत यानी चावल का स्थान अनमोल है। शास्त्रों के अनुसार, अक्षत के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। भोलेनाथ को भी अक्षत बेहद प्रिय है।

rice in Puja Rituals

पूजा में अक्षत को कैसे शामिल करें

अक्षत का अर्थ क्या होता है

धर्मशास्त्रों में 'अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकुमाक्ता: सुशोभिता:। मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर' श्लोक का उल्लेख मिलता है। ‘अक्षत’ का अर्थ है ‘जो टूटा न हो’, जो पवित्रता, समृद्धि और अखंडता का प्रतीक है। पुराणों में इसे 33 कोटी देवी-देवताओं को प्रिय बताया गया है। भगवान शिव को अक्षत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में अक्षत को विशेष स्थान प्राप्त है। देवी-देवता की पूजा हो, या तीज-त्योहार हो, यज्ञ में आहुति या तिलक करना अक्षत के बिना कोई मांगलिक कार्य नहीं होता।

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