Premanand Maharaj Pravachan: प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध धर्म प्रचारक, संत और कथा वाचक हैं। जिन्होंने अपने सरल, सटीक और गूढ़ प्रवचनों से लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है। उनका जीवन भक्ति, सेवा, संयम और सत्य की प्रेरणा देता है। स्वामी प्रेमानंद जी महाराज के कई ऐसे विचार हैं जो आज के समय में लोगों को भक्ति और सुखी जीवन का मार्ग दिखाते हैं। तो, चलिए जानते हैं उनके 10 अमृत तुल्य विचार...
प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार
- वैभव मिलना कृपा नहीं है, यह पुण्य है। पुण्य से एक घोर पापी को भी बल मिल जाता है, पाप करके भी उनका कोई पुण्य है जिसे वह भोग रहा है। ये वैभव या यश का बढ़ना भगवान की कृपा नहीं मानी जाती है। अंदर के चिंतन से ही सबकुछ बदलता है। इससे आपके कई जन्मों के कर्म भस्म हो जाते हैं और अगला जो आता है, वह उत्तम होता है।
- प्रेम ही जीवन और संसार का सच्चा आधार है और यह सभी जीवों के दिलों में बसा हुआ है।
- कोई व्यक्ति तुम्हें दु:ख नहीं देता बल्कि तुम्हारे कर्म उस व्यक्ति के द्वारा दु:ख के रूप में प्राप्त होते हैं।
- क्रोध को शांत करने के लिए एक ही उपाय है... बजाय यह सोचने के कि उसका हमारे प्रति क्या कर्तव्य है, हम यह सोचे कि हमारा उसके प्रति क्या कर्तव्य है।
- प्रभु का नाम जप संख्या से नहीं डूब कर करो।
- मनुष्य की असली महानता उसके विचारों में है, न कि बाहरी रूप में
- सत्य की राह में चलने वाले की निंदा बुराई अवश्य होती है। इससे घबराना नहीं चाहिए। यह आपके बुरे कर्मों का नाश करती है। जहां आपके लिए निंदा और बुराई हो, वहां आपके बुरे कर्मों का नाश हो जाता है।
- स्वयं को ईश्वर को समर्पित कर दो। यह जीवन जैसा भी है, उनका दिया हुआ है। तुम्हारे पास जितने भी साधन संसाधन है, वह उनकी कृपा का प्रभाव है। तुम जिसका भोग कर रहे हो, वह सब ईश्वर का है। ऐसे विचार के साथ कर्म करो, जीवन यापन करो, जीवन सुखमय होगा।
- ब्रह्मचर्य की रक्षा करें। ब्रह्मचर्य बहुत बड़ा अमृत तत्व है, मूर्खता के कारण लोग इसे ध्यान नहीं देते हैं।
- हमें सच्चा प्रेम प्रभु से प्राप्त होता है। किसी व्यक्ति से क्या होगा, कोई व्यक्ति हमसे प्यार कर ही नहीं सकता क्योंकि वो हमे जानता ही नहीं तो कैसे करेगा।
