Premanand Ji Maharaj Darshan Time (10 April 2026): वृंदावन में श्री प्रेमानंद जी महाराज के दर्शनों के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु उमड़ते हैं। यदि आप कल, शुक्रवार यानी 10 अप्रैल 2026 को महाराज जी (Premanand Ji Maharaj) की परिक्रमा या आश्रम में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो सुरक्षा और सुविधा के लिए समय सारणी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यहाँ जानें महाराज जी के कल के दर्शन का संभावित शेड्यूल।
प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन कैसे करें
प्रेमानंद जी महाराज का (10 अप्रैल 2026) का कार्यक्रम
प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम केली कुंज में आध्यात्मिक ऊर्जा और भजनों का प्रवाह सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाता है। कल का आश्रम का संभावित मॉर्निंग शेड्यूल इस प्रकार है।
- सुबह 04:15 – 05:45 से दैनिक सत्संग होगा, जिसमें महाराज जी के वचनों को सुनने का मौका मिलता है।
- इसके बाद 05:45 – 06:30 तक मंगला आरती और वन विहार का कार्यक्रम निश्चित है।
- इसके साथ ही 06:30 – 08:15 तक श्री राधा सुधा निधि पाठ किया जाएगा। जो शुक्रवार के दिन होने वाला विशेष पाठ है।
- इसके बाद 7– 8 बजे तक का समय एकांतिक वार्तालाप के लिए तय है। जिसमें चुनिंदा जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं।
- श्रृंगार आरती और भक्त नामावली के पाठ के लिए 08:15 – 09:00 तक का समय तय है।
- जबकि 09:00 – 09:30 तक राधा नाम संकीर्तन के साथ सुबह की दिनचर्या का समापन होता है।
क्या कल शाम को होगी महाराज जी की परिक्रमा?
जी नहींअब महाराज जी के दर्शन परिक्रमा मार्ग पर नहीं होते हैं, वह काफी समय पहले वहां निकलना बंद कर चुके हैं। वर्तमान में वे सौभरि कुंड वन की ओर जाते हुए, कुंड के पास भक्तों को दर्शन देते हैं। सुबह 6 से 9 बजे के बीच उनका आगमन होता है, जबकि श्रद्धालु रात 1 बजे से ही वहां जुटने लगते हैं, खासकर शनिवार और रविवार को भीड़ अधिक रहती है। केलिकुंज आश्रम से लगभग 1 किमी दूर स्थित इस स्थान तक वे कार से पहुंचते हैं और फिर पैदल चलते हुए दर्शन देकर आगे बढ़ जाते हैं।
केली कुंज आश्रम का शाम का शेड्यूल
शाम के समय भी केली कुंज आश्रम में भक्तिमय वातावरण रहता है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है।
- 04:00 PM – 04:15 PM: धूप आरती
- 04:15 PM – 05:15 PM: वाणी पाठ
- 05:15 PM – 05:45 PM: सत्संग एवं चर्चा
- 05:45 PM – 06:00 PM: संध्या आरती
नोट - इसके बाद भी महाराज जी का स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस सर्वोपरि हैं। दर्शन के समय में मौके पर कोई भी अचानक बदलाव हो सकता है, इसलिए आश्रम के सूचना पटल या स्थानीय सेवादारों के निर्देशों का पालन अवश्य करें।
