Paush Amavasya 2022 Vrat Katha in Hindi: साल की अंतिम अमावस्या पौष अमावस्या 23 दिसंबर शुक्रवार को है । यह इस वर्ष की आखिरी अमावस्या है इसके बाद शुक्ल पक्ष प्रारंभ हो जाएगा। यह अमावस्या मनोकामना पूर्ण करने वाली है।इस दिन विधि विधान से पूजा करने से देवता प्रसन्न होते हैं और पितरों का विशेष आशीर्वाद मिलता है।विवाहित स्त्रियों को इस दिन व्रत करना चाहिए।
हिंदू पंचांग के अनुसार पौष अमावस्या तिथि 22 दिसंबर 2022 को शाम 07 बजकर 14 मिनट पर आरंभ होकर 23 दिसंबर 2022 को दोपहर 03 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। कथा अनुसार इस दिन पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर उसकी पूजा करनी चाहिए आइए जानते हैं इसके पीछे का इतिहास।
Paush amavasya vrat katha
एक गरीब ब्राह्मण को एक अत्यंत बुद्धिमान और सुंदर पुत्री का जन्म हुआ जब वह विवाह योग्य हुई तो बहुत प्रयत्न के बाद भी उसका विवाह तय नहीं हुआ। निराश ब्राह्मण ने एक साधु की सेवा की और अपनी पुत्री के लिए वरदान मांगा।साधु ने कन्या को विवाह के लिए उपाय बताया और कहा कि यहां से कुछ दूरी पर एक गरीब परिवार रहता है उस परिवार की वधु अति पतिव्रता है। यदि यह कन्या उसकी पत्नी की सेवा करें तो विवाह में आ रही अड़चन दूर हो जाएगी। साधु की बात मानकर कन्या ने ऐसा ही किया अब वह हर रोज सुबह उनके घर जाकर साफ सफाई कर उनकी सेवा करने लगी।
घर में रहने वाली स्त्री यह देखकर हैरान रह जाती कि हर रोज उसके जागने से पहले उसके घर सफाई कौन कर जाता है। एक दिन स्त्री ने उस कन्या को ऐसा करते हुए देख लिया और पूछने लगी कि आप कौन हैं, तब कन्या ने उसे साधु द्वारा बताई गई सारी बातें बताई।उस स्त्री ने कन्या की सेवा से खुश होकर उसने अपनी मांग का सिंदूर कन्या की मांग में लगा दिया और शीघ्र विवाह होने का आशीर्वाद दिया। लेकिन ऐसा करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई उस स्त्री ने हार नहीं मानी और अपने पति को जीवनदान मांगने के लिए आँगन में लगे हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करने लगी और भगवान विष्णु से अपने पति का जीवन लौटाने की प्रार्थना की।
वह दिन पौष अमावस्या का दिन था। भगवान की कृपा से उसका पति फिर से जीवित हो गया। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति पौष अमावस्या के दिन स्नान-दान कर पीपल की परिक्रमा करता है और भगवान विष्णु का ध्यान लगाता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
