Navpatrika Puja 2025 Date: नवपत्रिका पूजा में नौ पौधों के पत्ते हल्दी, जौ, बेल के पत्ते, अनार, अशोक, अरुम, केला, कच्छवी और धान के पत्तों को मिलाकर बनाए गए गुच्छे की पूजा की जाती है। इन नौ पत्तों को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। इन नौ पत्तों को सूर्योदय से पहले पवित्र जल में स्नान कराया जाता है जिसे महास्नान कहा जाता है। इसके बाद पूजा पंडाल में नवपत्रिका रखी जाती है। इस पूजा को पश्चिम बंगाल में कल्लाबोऊ पूजा भी कहा जाता है। माना जाता है कि नवरात्री में नवपत्रिका की पूजा करने से अच्छी उपज मिलती है। इसलिए किसान नवपत्रिका की पूजा करते हैं। यहां से जानें इस साल ये पूजा किस दिन है और इसे कैसे की जाती है।
नवपत्रिका पूजा 2025 डेट (Navpatrika Puja Date 2025)
सप्तमी तिथि 28 सितंबर को 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू हो रही है और 29 सितंबर को 4 बजकर 33 मिनट पर ये समाप्त होगी। अब नवपत्रिका पूजा सप्तमी के दिन ही होती है और उदया तिथि के हिसाब से सप्तमी 29 सितंबर को है तो इसी दिन नवपत्रिका मनाई जाएगी।
नवपत्रिका पूजा कैसे की जाती है? (Navpatrika Puja Vidhi)
नवपत्रिका पूजा महासप्तमी के दिन की जाती है, जिसमें नौ प्रकार के पत्तों को केले के पेड़ के साथ बांधा जाता है और उन्हें लाल साड़ी में सजाकर स्नान कराया जाता है। इसके बाद नवपत्रिका को मां दुर्गा की मूर्ति के पास स्थापित कर षोडशोपचार पूजा की जाती है, जिसमें देवी को जल, फल, फूल आदि चढ़ाए जाते हैं। अंत में दुर्गा माता की आरती की जाती है और प्रसाद का वितरण होता है।
