How to Wear Pearl Gemstone (मोती धारण करने के नियम) : ज्योतिष और रत्न शास्त्र के अनुसार, रत्न हमारी कुंडली में मौजूद ग्रहों की शुद्धता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अनुसार, पृथ्वी पर पाए जाने वाले हर रत्न किसी न किसी ग्रह से सम्बंधित होता है। फलस्वरूप, इसे धारण करने से जातक की सभी परेशानी दूर हो जाती है। हालांकि, किसी विद्वान की सलाह के बिना रत्न धारण नहीं करना चाहिए। ज्योतिषों का मानना है कि रत्न जन्मतिथि, कुंडली और ग्रह नक्षत्रों के आधार पर ही धारण करना चाहिए। अपने मन से कोई भी मोती धारण कर लेने से ये अशुभ प्रभाव भी देते हैं। साथ ही इसे धारण करने के लिए कुछ खास नियम भी बताए गए हैं। तो चलिए जानते हैं मोती धारण कब, क्यों और कैसे करना अतिशुभ और फलदाई सिद्ध हो सकता है।
मोती धारण करने के नियम
मोती धारण करने की विधि
- मोती धारण आप किसी भी महीने की शुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन कर सकते हैं।
- मोती धारण करने से पहले इसे दूध, दही, शहद, घी, तुलसी पत्ते, पंचामृत आदि से स्नान कराएं।
- इसके बाद गंगाजल से साफ करके धूप-दीप और कुमकुम से अंगूठी की पूजन।
- फिर, ॐ चं चन्द्राय नमः मंत्र को 108 बार जपने के बाद इसे कनिष्ठा उंगली यानी सबसे छोटी उंगली में मोती धारण कर लें।
- किसी भी रत्न का सकारात्मक प्रभाव बनाए रखने के लिए उसकी शुद्धता पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।
मोती धारण करने के नियम
- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, मोती को हमेशा चांदी की अंगूठी में जड़वा कर ही धारण करना चाहिए।
- मोती धारण करने के लिए सबसे शुभ दिन शुक्ल पक्ष का सोमवार है।
- इसके अलावा मोती को पूर्णिमा तिथि पर भी धारण कर सकते हैं।
- मोती रत्न को गंगाजल से धोकर इसे शुद्ध करके ही धारण करना चाहिए।
मोती से क्या नुकसान हो सकता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्यादा भावनात्मक या क्रोधी लोगों को मोती या चांदी धारण नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से उनका क्रोध और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा 10वें या 12वें स्थान पर हो उन्हें भी मोती धारण नहीं करना चाहिए। साथ ही मोती धारण करते समय ये याद रखें कि मोती के साथ हीरा, पन्ना या नीलम आपके उंगलियों में पहले से न हो। ये सभी रत्नों को एक साथ धारण करना अशुभ प्रभाव का संकेत माना जाता है।
