Makar Sankranti Vrat Katha: मकर संक्रांति व्रत कथा, आज जरूर पढ़ें धर्मराज की कहानी

Makar Sankranti Vrat Puja Katha (मकर संक्रांति 2026 व्रत कथा): धार्मिक मान्यताओं अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगा मैया भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जा मिली थीं। कहते ये भी हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत किया था। साथ ही इस पर्व की एक कहानी धर्मराज से भी जुड़ी है। यहां से आप मकर संक्रांति की कथा और कहानी पढ़ सकते हैं।

Makar Sankranti Vrat Puja Katha (मकर संक्रांति 2026 व्रत कथा): मकर संक्रांति की कथा अनुसार, एक समय जब पृथ्वीलोक पर बबरुवाहन नामक एक राजा हुआ करता था। उसके राज्य में किसी चीज की कमी नहीं थी। इसी राज्य में एक हरिदास नामक ब्राह्मण भी निवास करता था। जिसका विवाह गुणवती से हुआ था जो कि बहुत ही धर्मवती एवं पतिव्रता महिला थी। गुणवती ने अपना पूरा जीवन सभी देवी देवताओं की उपासना में लगा दिया और वह सभी प्रकार के व्रत करती थी और दान धर्म भी किया करती थी। इसके अलावा अतिथि सेवा को वह अपना धर्म मानती थी। ऐसे ही ईश्वर की उपासना करते हुए वह वृद्ध हो गयी। जब उसकी मृत्यु हुई तो धर्मराज के दूत उसे अपने साथ धर्मराजपुर ले गए।

Makar Sankranti Vrat Katha

मकर संक्रांति व्रत कथा (AI Generated)

यमलोक में एक सुन्दर सिंहासन पर यम धर्मराज विराजमान थे और उनके पास ही चित्रगुप्त भी बैठे थे। चित्रगुप्त जब धर्मराज को प्राणियों का लेखा जोखा सुना रहे थे तभी यमदूत गुणवती को लेकर पहुंचे। गुणवती यमराज को देखकर थोड़ी भयभीत हुई और मुंह निचे करके खड़ी हो गयी। फिर चित्रगुप्त ने गुणवती का ब्यौरा निकाला और उसके बारे में धर्मराज को बताया। धर्मराज ने गुणवती का पूरा ब्यौरा देखा और वे प्रसन्न हुए लेकिन फिर भी उनके मुख पर थोड़ी सी उदासी भी छायी हुई थी। यह देखकर गुणवती ने पूछा – हे प्रभु, मैंने तो अपने जीवन काल में सारे सत्कर्म ही किये फिर भी आपके मुख पर उदासी छायी है इसका कारण क्या है? प्रभु मुझसे क्या भूल हुई है?

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