Mahavir Jayanti 2024 Date: महावीर जयंती पर्व जैन समाज के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 21 अप्रैल को मनाया जाएगा। कहते हैं कि भगवान महावीर ने देश भर में अहिंसा परमो धर्म का संदेश फैलाया और सभी को सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया। जानकारी अनुसार भगवान महावीर का जन्म 599 ईसवी में चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को बिहार के एक राजघराने में हुआ था।
Mahavir Jayanti 2024
कौन थे भगवान महावीर? (Who was Lord Mahavir?)
देश भर में 'अहिंसा परमो धर्म' का संदेश फैलाने वाले भगवान महावीर जैन समुदाय के अंतिम तीर्थंकर थे। राजघराने में जन्म लेने वाले भगवान महावीर ने 30 साल की उम्र में ही सभी सुख-सुविधाओं को त्याग कर दिया था और अपने लिए उन्होंने तप और साधना का रास्ता चुना। करीब 12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद उन्होंने अपनी सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त की और 42 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसी वजह से वे महावीर के नाम से प्रसिद्ध हुए। भगवान महावीर को वर्धमान, वीर, अतिवीर और सन्मति इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है।
कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती? (How is Mahavir Jayanti celebrated?)
महावीर जयंती के दिन जैन समुदाय के लोग भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक करते हैं। इसके बाद महावीर भगवान की मूर्ति या तस्वीर को एक रथ पर बिठाकर शानदार जुलूस निकाला जाता है। मुख्य रूप से इस त्यौहार को गुजरात और राजस्थान में मनाया जाता है।
महावीर जयंती पर क्या करें (What To Do On Mahavir Jayanti)
- कई जगह इस दिन लोग अपने घरों में बर्तन बजाकर महावीर स्वामी का गुणगान करते हैं।
- इस दौरान कई लोग ‘जियो और जीने दो’ का नारा लगाते हैं।
- शाम को घरों में दीपक जलाया जाता है।
- इस दिन घर की महिलाएं और लड़कियां केसरिया वस्त्र पहनती हैं और पुरुष सफेद वस्त्र धारण करते हैं।
- इसके बाद अगले दिन महामंत्र नवकार का जाप किया जाता है।
भगवान महावीर के सिद्धांत (Lord Mahvir Teachings)
भगवान महावीर ने वैसे तो समाज को कई सिद्धांत दिए थे लेकिन इनमें सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत था अहिंसा का। भगवान महावीर हमेशा हिंसा के खिलाफ रहे और लोगों को अहिंसा का मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा भगवान महावीर ने सत्य की राह पर चलना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, इत्यादि सिद्धांत भी दिए।
