Mahashivratri Vrat Katha (शिवरात्रि की कथा): इस पावन कथा के बिना अधूरा है शिवरात्रि व्रत, जानें इस पर्व की महिमा

Mahashivratri Vrat Katha (महाशिवरात्रि व्रत की कथा): प्राचीन काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जिसने अनजाने में ही महाशिवरात्रि व्रत की पूजन विधि संपन्न कर ली थी। जिसके प्रभाव से उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो गए थे। कहते हैं शिवरात्रि व्रत में जो भी व्यक्ति इस कथा को सुनता है उसका जीवन भी सुख-समृद्धि से भर जाता है।

Mahashivratri Vrat Katha (महाशिवरात्रि व्रत की कथा): महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है जो क‍ि भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की रात्रि में माता पार्वती और भोलेनाथ का विवाह हुआ था। इसलिए ही इस पवित्र दिन पर लोग व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में विधि विधान भोलेनाथ की उपासना करते हैं। इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो मनुष्य सच्चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत रखता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं तो इस दिन ये पवित्र कथा जरूर पढ़ें या सुनें।

Shivratri Vrat Katha (शिवरात्रि व्रत की कथा)

प्राचीन काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। पशुओं की हत्या करके वो अपने कुटुम्ब को पालता था। वो एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन ऋण समय पर न चुका सकने पर क्रोधित साहूकार ने उसको शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। बंदी रहते हुए शिकारी मठ में शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा, वहीं उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी। संध्या होने पर साहूकार ने उसे बुलाया और ऋण चुकाने के लिए पूछा तो शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन दिया। साहुकार ने उसकी बात मान ली और उसे छोड़ दिया। शिकारी जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण वो भूख-प्यास से व्याकुल था।

End of Feed