Maha Shivratri (Mahashivratri) 2023 Date: एक साल में कुल 12 या 13 शिवरात्रि पड़ती हैं। लेकिन इन सभी में फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व माना जाता है। जो फरवरी या मार्च में पड़ती है। इस साल महाशिवरात्रि 18 फरवरी को पड़ रही है। पौराणिक मान्यताओं अनुसार महाशिवरात्रि का महत्व इसलिए है क्योंकि ये शिव और शक्ति के मिलन की रात है। लेकिन क्या आपको पता है कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? जानते हैं इस बारे में।
शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि है 'महाशिवरात्रि'
इस दिन शिव और शक्ति का हुआ था मिलन
महाशिवरात्रि की पूरी रात शिवभक्त भगवान शिव की अराधना करते हैं। शिवजी की शादी का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने अपना वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था।
इस दिन पहली बार प्रकट हुए थे शिवजी
ऐसा मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। ये शिवलिंग इतना विशालकाय था कि इसकी शुरुआत और अंत का पता ही नहीं लग पा रहा था। तब ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के ऊपरी भाग को देखने के लिए गए। वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह के रूप में शिवलिंग के आधार को ढूंढने के लिए गए। लेकिन दोनों ही सफल नहीं हो पाए क्योंकि इस शिवलिंग का न तो आदि था और न ही अंत।
64 जगहों पर प्रकट हुए थे शिवलिंग
एक और कथा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग विभिन्न 64 जगहों पर प्रकट हुए थे। जिनमें से 12 जगह का नाम ही पता चल पाया। जिन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दीपस्तंभ लगाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि लोग शिवजी के अग्नि वाले अनंत लिंग का अनुभव कर सकें।
