Kartik Maas ki Katha, कार्तिक मास की कथा : आज से कार्तिक मास शुरू हो रहा है। पंचांग अनुसार, उत्तर भारत में कार्तिक मास 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होगा। इस पवित्र महीने में स्नान, दान, दीपदान और भगवान विष्णु व श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में व्रत और पूजा करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
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इस दौरान श्रद्धालु पूरे महीने नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत कथाएं सुनते हैं। कार्तिक मास से जुड़ी ऐसी ही एक रोचक पौराणिक कथा है, जिसमें भगवान कृष्ण एक बुजुर्ग महिला को खिचड़ी देते हैं। पड़ोसन की ईर्ष्या के कारण खिचड़ी का कटोरा गायब हो जाता है, लेकिन आगे चलकर उसी घटना से एक चमत्कार होता है। यहां पढ़ें कार्तिक मास की कथा, कार्तिक मास व्रत की कहानी क्या है।
कार्तिक मास की कथा इन हिंदी
प्राचीन समय में एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहती थी। वह नियमित रूप से कार्तिक मास का व्रत रखती थी। जब उसके व्रत खोलने का समय होता, तब भगवान श्रीकृष्ण उसके लिए एक कटोरा खिचड़ी रखकर चले जाते थे। महिला उसी खिचड़ी से अपना व्रत खोलती थी। उसके पड़ोस में रहने वाली एक महिला यह देखकर जलती थी कि अकेली रहने वाली बुजुर्ग महिला को भी भोजन मिल जाता है। एक दिन जब बुजुर्ग महिला कार्तिक स्नान के लिए गंगा गई, तब भगवान कृष्ण उसके लिए खिचड़ी रख गए। पड़ोसन ने मौका देखकर खिचड़ी का कटोरा उठाया और घर के पीछे फेंक दिया।
जब बुजुर्ग महिला स्नान करके लौटी, तो उसे खिचड़ी नहीं मिली। वह दुखी होकर बार-बार कहने लगी, “कहां गई मेरी खिचड़ी और कहां गया मेरा खिचड़ी का कटोरा?” जिस स्थान पर खिचड़ी फेंकी गई थी, वहां एक पौधा उग आया और उसमें दो फूल खिले। एक दिन राजा वहां से गुजरे। उनकी नजर उन फूलों पर पड़ी, तो वे उन्हें तोड़कर महल ले गए और रानी को दे दिए। रानी ने जब उन फूलों को सूंघा, तो धार्मिक कथा के अनुसार वह गर्भवती हो गई। कुछ समय बाद उसने दो पुत्रों को जन्म दिया।
दोनों राजकुमार बड़े हुए, लेकिन वे किसी से बात नहीं करते थे। हालांकि, जब वे शिकार के लिए जाते, तो रास्ते में बुजुर्ग महिला मिलती थी। वह अब भी अपनी खिचड़ी और कटोरे को याद करके वही बात दोहराती थी। इस पर दोनों राजकुमार कहते, “हम हैं तेरी खिचड़ी और हम हैं तेरा बेला।” जब राजा को यह बात पता चली, तो उन्होंने बुजुर्ग महिला को महल बुलाया और पूछा कि दोनों राजकुमार उससे ही क्यों बात करते हैं। महिला ने पूरी घटना सुनाई और बताया कि भगवान कृष्ण उसे कार्तिक व्रत के दौरान खिचड़ी दिया करते थे।
तब दोनों राजकुमारों ने बताया कि पड़ोसन ने खिचड़ी फेंक दी थी, जिससे दो फूल उगे। राजा उन फूलों को महल ले आए और रानी के सूंघने से उनका जन्म हुआ। भगवान ने ही उन्हें बुजुर्ग महिला के लिए भेजा था। यह सुनकर राजा ने बुजुर्ग महिला को महल में रहने के लिए कहा। हे कार्तिक महाराज! जैसे आपने बुजुर्ग महिला की पुकार सुनी, वैसे ही कार्तिक मास का व्रत करने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं सुनना और उन पर अपनी कृपा बनाए रखना।
