छठ का पर्व छठी माता और सूर्य देव को समर्पित है। ये साल में दो बार आता है, एक यमुना छठ है और दूसरा कार्तिक छठ। दोनों ही छठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होते हैं और सप्तमी के दिन समापन होता है। दोनों ही छठ के दौरान 36 घंट व्रत रखने का विधान है और संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए इस दौरान व्रत रखा जाता है। लेकिन इन दोनों छठ पूजा में कई सारे अंतर भी हैं। यहां से आप यमुना छठ और कार्तिक छठ के बीच का अंतर जान सकते हैं।
यमुना छठ क्या है?
यमुना छठ आमतौर पर चैत्र महीने यानी मार्च या अप्रैल में मनाई जाती है। इसे खासकर यमुना नदी के किनारे रहने वाले लोग ज्यादा मानते हैं। इस दिन यमुना मैया की पूजा होती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार की खुशहाली और पापों से मुक्ति मिलती है।
कार्तिक छठ क्या है?
कार्तिक छठ कार्तिक महीने यानी अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है। इसे छठ पूजा भी कहा जाता है। कार्तिक माह को सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। यह बिहार, यूपी, झारखंड और नेपाल में बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसमें लोग 4 दिन का कठिन व्रत रखते हैं और सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करते हैं। नदी या तालाब में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
यमुना छठ और कार्तिक छठ में क्या अंतर है?
- कार्तिक छठ के दौरान माता पार्वती की पूजा का विधान है जबकि चैती छठ में माता सीता की पूजा की जाती है।
- चैती छठ की तुलना में कार्तिक छठ के दौरान नहाय-खाय का विशेष महत्व माना गया है। कार्तिक छठ को सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।
- कार्तिक छठ में सूर्य देव के साथ उषा देवी की पूजा की जाती है, जबकि चैती छठ में सूर्य देव के साथ छठी मैया की आराधना की जाती है।
- एक अंतर ये भी है कि ये दोनों पर्व एक होने के बावजूद भी साल के अलग-अलग महीनों में आते हैं।
छठ पूजा के नियम-
छठ पूजा के दौरान साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। वहीं शुद्ध आचार-विचार के साथ सात्विक भोजन ही करना चाहिए। छठ पूजा में जो भी प्रसाद लोगों में बांटने के लिए तैयार किया जाता है। उसे सिर्फ व्रत करने वाले को ही बनाना चाहिए। इसके अलावा छठ पर्व के किसी भी भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग करना वर्जित होता है।
