सावन का महीना आते ही देशभर में 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों के साथ कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है। हर साल लाखों शिव भक्त गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी से जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को समाप्त होगी। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि कांवड़ यात्रा सिर्फ एक ही तरह की नहीं होती।
सावन के पावन माह में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, क्षमता और परंपरा के अनुसार अलग-अलग प्रकार की कांवड़ यात्रा करते हैं। कहीं भक्त आराम से रुकते हुए यात्रा पूरी करते हैं, तो कहीं बिना रुके लगातार चलते हैं। कुछ लोग पूरी यात्रा नंगे पैर करते हैं, तो कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए कांवड़ उठाते हैं। अगर आप पहली बार कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे हैं या इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो समझिए कि कांवड़ यात्रा के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं।
1. सामान्य कांवड़ (Simple Kanwar)
यह सबसे आम प्रकार की कांवड़ यात्रा है। इसमें श्रद्धालु पवित्र नदी से जल भरते हैं और रास्ते में जरूरत के अनुसार आराम करते हुए अपने मंदिर या शिवालय तक पहुंचते हैं। पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले अधिकतर लोग इसी प्रकार की यात्रा चुनते हैं।
2. डाक कांवड़ (Dak Kanwar)
डाक कांवड़ सबसे कठिन यात्राओं में गिनी जाती है। इसमें कांवड़िया जल भरने के बाद बिना रुके लगातार चलते या दौड़ते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। रास्ते में कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। इस यात्रा में पूरी टीम मिलकर नियमों का पालन करती है।
3. खड़ी कांवड़ (Khadi Kanwar)
खड़ी कांवड़ में कांवड़ को जमीन पर रखना वर्जित माना जाता है। जब किसी कारण से रुकना पड़ता है, तो कांवड़ को किसी स्टैंड या दूसरे व्यक्ति के सहारे रखा जाता है। इस प्रकार की यात्रा में अनुशासन और सावधानी का विशेष महत्व होता है।
4. दांडी कांवड़ (Dandi Kanwar)
इस प्रकार की यात्रा में श्रद्धालु हर कुछ कदम पर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। यह यात्रा बहुत कठिन मानी जाती है और इसे गहरी आस्था तथा विशेष संकल्प के साथ किया जाता है। इसे पूरा करने में सामान्य यात्रा की तुलना में काफी अधिक समय लग सकता है।
5. वाहन कांवड़
कुछ श्रद्धालु लंबी दूरी होने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से यात्रा का कुछ हिस्सा वाहन से तय करते हैं। इसके बाद मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस परंपरा के नियम अलग हो सकते हैं।
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कांवड़ यात्रा केवल पैदल चलने का नाम नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा भी मानी जाती है। हर प्रकार की कांवड़ का अपना महत्व और नियम है। इसलिए अपनी क्षमता, स्वास्थ्य और परंपरा के अनुसार यात्रा का प्रकार चुनना सबसे सही माना जाता है।
