Kanha Ki Chhathi Ke Bhajan Lyrics: जन्माष्टमी के बाद कान्हा की छठी का उत्सव भी भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन घर में बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है, उन्हें भोग लगाया जाता है और पूजा-अर्चना के साथ मंगल गीत व भजन गाए जाते हैं। जिस तरह किसी नवजात शिशु की छठी पर घर की महिलाएं मिलकर गीत गाती हैं, उसी तरह लड्डू गोपाल की छठी पर भी कृष्ण के बाल स्वरूप का गुणगान करने की परंपरा है।
कान्हा की छठी के भजन
कान्हा की छठी के मौके पर घर में ढोलक की थाप, मंजीरों की झंकार और कृष्ण नाम का संकीर्तन वातावरण को भक्तिमय बना देता है। भजनों में कहीं यशोदा मैया का वात्सल्य नजर आता है तो कहीं नंदलाल की बाल लीलाओं की मनमोहक झलक दिखाई देती है। अगर आप भी अपने घर में कान्हा जी की छठी मना रहे हैं और पूजा के दौरान गाने के लिए भजन खोज रहे हैं, तो यहां दिए गए ये 5 मौलिक और भक्तिमय भजन (Kanha Chhathi Bhajan) आपके उत्सव में भक्ति का रंग भर सकते हैं।
1. नंद घर आई कान्हा की छठी
नंद घर आई कान्हा की छठी,
खुशियों से भर गई गलियां सारी।
फूलों से सज गया आंगन,
आई नंदलाला की बारी।
यशोदा मैया लाल सजाएं,
माथे चंदन तिलक लगाएं,
पीतांबर और मोर मुकुट से,
कान्हा की छवि लगे न्यारी।
माखन-मिश्री भोग लगाएं,
मिलकर मंगल गीत सुनाएं,
ढोलक की थाप पर झूमे गोकुल,
जय-जय बोले दुनिया सारी।
नंद घर आई कान्हा की छठी,
खुशियों से भर गई गलियां सारी।
2. आज सजे हैं नंदलाला
आज सजे हैं नंदलाला,
देखो कितने प्यारे हैं।
मोर मुकुट सिर पर दमके,
नैन बड़े मतवाले हैं।
चंदन का तिलक सजाया,
फूलों का हार पहनाया,
माखन-मिश्री थाल में रखकर,
मैया ने भोग लगाया।
राधा संग सखियां आईं,
मंगल गीत सभी ने गाए,
कान्हा की मुस्कान देखकर,
सबने अपने मन बहलाए।
आज सजे हैं नंदलाला,
देखो कितने प्यारे हैं।
3. यशोदा के आंगन में छाई बहार
यशोदा के आंगन में,
आज छाई बहार।
छठी मनाने आए हैं,
नंद के लाला सरकार।
ढोलक बजे, मंजीरे खनके,
सखियों के स्वर मीठे छनके,
फूल बरसाएं ब्रज की गलियां,
गूंजे कृष्ण नाम अपार।
माखन-मिश्री भोग लगाएं,
प्रेम से कान्हा को रिझाएं,
जिस घर में हो कृष्ण का नाम,
वहां रहे सुख हजार।
यशोदा के आंगन में,
आज छाई बहार।
4. मेरे घर आए नंदलाला
मेरे घर आए नंदलाला,
मेरी किस्मत जाग गई।
नन्हे-नन्हे चरण तुम्हारे,
देख मेरी आंखें भाग गईं।
फूलों से मैं सेज सजाऊं,
प्रेम से तुमको भोग लगाऊं,
मोर मुकुट और पीतांबर में,
छवि तुम्हारी मन में बस गई।
तेरा नाम सुबह मैं गाऊं,
तेरा नाम ही शाम सुनाऊं,
मेरे घर की हर खुशियों में,
कान्हा तेरी छवि समा गई।
मेरे घर आए नंदलाला,
मेरी किस्मत जाग गई।
5. कान्हा की छठी आई रे
कान्हा की छठी आई रे,
गोकुल में खुशियां लाई रे।
नंद भवन में दीप जलें हैं,
हर ओर बधाई छाई रे।
मैया ने काजल लगाया,
लाल को गोद में खूब खिलाया,
माखन-मिश्री लेकर आई,
प्रेम की थाली सजाई रे।
सखियां मिलकर गीत सुनाएं,
कान्हा के गुण सबको बताएं,
जिसने प्रेम से नाम पुकारा,
उसकी झोली भर आई रे।
कान्हा की छठी आई रे,
गोकुल में खुशियां लाई रे।
छठी पर भजन गाने की परंपरा खास क्यों है ?
कान्हा की छठी पर भजन और मंगल गीत गाने का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बाल कृष्ण के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करना भी है। भक्ति गीतों के माध्यम से भक्त कान्हा के बाल स्वरूप, उनकी चंचल लीलाओं और यशोदा मैया के वात्सल्य को याद करते हैं। घर में परिवार के लोग एक साथ बैठकर कृष्ण भजन गाते हैं तो छठी का उत्सव और भी आत्मीय हो जाता है। ढोलक, मंजीरे और भक्ति के सुरों के बीच जब पूरा परिवार कान्हा का नाम लेता है, तो वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक आनंद महसूस होता है।
इसलिए कान्हा की छठी पर पूजा और भोग के साथ भजन-कीर्तन को भी उत्सव का हिस्सा बनाया जा सकता है। इन पांच मौलिक भजनों को आप अपनी सुविधा के अनुसार छठी पूजा के दौरान गा सकते हैं और नंदलाल के बाल स्वरूप की भक्ति में डूब सकते हैं।
