Jitiya Cheel Siyarin Katha : चील और सियारिन की कहानी क्या है, जितिया व्रत के दिन जरूर पढ़ें चील-सियारन की कथा

Jitiya Cheel Siyarin Katha : जितिया व्रत के दिन चील-सियारन की कथा सुनना और पढ़ना बेहद ही शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि ये चील-सियारन की कथा क्या है।

Jitiya Cheel Siyarin Katha : आज 3 अक्टूबर 2026 को जितिया व्रत रखा जा रहा है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में जितिया व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत में पूजा के साथ ही चील और सियारिन की कथा भी सुनी व पढ़ी जाती है। मान्याता है भगवान जीमूतवाहन की कथा के साथ इस कथा का पाठ या श्रवण करना भी जरूरी होता है।

Jitiya Cheel Siyarin Katha  चील-सियारन कि कथा

चील-सियारन कि कथा

चील और सियारन की कथा

एक समय की बात है। एक घने जंगल में एक बड़े से पेड़ पर एक चील रहती थी। उसी पेड़ के नीचे एक सियारिन भी रहती थी। दोनों में बहुत गहरी मित्रता थी। वे एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ रहती थीं। चील जब भी भोजन लेकर आती तो अपनी सखी सियारिन को भी उसमें से हिस्सा देती और दोनों मिलकर समय बिताती थीं।

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