Jitiya Vrat 2026 Date: संतान के बेहतर जीवन की कामना से जुड़ा है जितिया व्रत। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत और जिउतिया व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत खासतौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित है। वहीं नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी महिलाएं इसे पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं। यह केवल एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि नहाय-खाय से पारण तक चलने वाली तीन दिन की परंपरा है।
जितिया व्रत कब रखा जाएगा 2026 में
जितिया व्रत 2026 में कब है
साल 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। व्रती महिलाएं संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुरक्षित जीवन की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं।
उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी। ऐसे में मुख्य व्रत की तारीख 3 अक्टूबर रहेगी।
| जितिया पर्व की परंपरा | तारीख |
|---|---|
| नहाय-खाय | 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार |
| जितिया निर्जला व्रत | 3 अक्टूबर 2026, शनिवार |
| व्रत पारण | 4 अक्टूबर 2026, रविवार |
| मुख्य तिथि | आश्विन कृष्ण अष्टमी |
जितिया व्रत 2026 में नहाय-खाय कब है
जितिया पर्व की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को नहाय-खाय से होगी। इस दिन महिलाएं स्नान करके शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। कई घरों में इस दिन बनने वाले भोजन का स्वरूप स्थानीय परंपरा से तय होता है।
बिहार और पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी, झिंगनी या सतपुतिया की सब्जी और दही-चूड़ा जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं। कुछ परिवारों में माताएं सुबह सूर्योदय से पहले भोजन करती हैं, जिसे स्थानीय बोलचाल में ओठगन कहा जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार इसके नियम अलग हो सकते हैं।
जितिया व्रत क्यों रखा जाता है
जितिया व्रत संतान के जीवन में आने वाली परेशानियों से रक्षा और उसके अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि मां अपनी जरूरतों को पीछे रखकर पूरे दिन बच्चे के लिए प्रार्थना करती है।
जितिया व्रत की पूजा विधि
जितिया व्रत की विधि अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़ी बदल सकती है, लेकिन सामान्य रूप से पूजा इस प्रकार की जाती है—
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत रखें।
- पूजा स्थल को साफ करके जीमूतवाहन की प्रतिमा या प्रतीक स्थापित करें।
- चील और सियारिन के प्रतीक बनाकर उनकी भी पूजा की जाती है।
- फूल, अक्षत, धूप, दीप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- संतान के उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना करें।
- परिवार की महिलाओं के साथ जितिया व्रत कथा सुनें।
- अगले दिन निर्धारित समय पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर पारण करें।
जितिया व्रत कथा में कौन हैं जीमूतवाहन
जितिया व्रत की प्रमुख कथा राजा जीमूतवाहन से जुड़ी है। मान्यता है कि वह दयालु और त्यागी राजा थे। उन्होंने एक नाग की जान बचाने के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया था। उनके साहस और करुणा से प्रभावित होकर गरुड़ ने नागों को अपना भोजन न बनाने का वचन दिया।
इस कथा में केवल किसी एक संतान की रक्षा की बात नहीं आती। जीमूतवाहन ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं जो किसी दूसरे परिवार का दुख देखकर भी मुंह नहीं मोड़ते। शायद इसीलिए यह कथा आज भी मांओं के व्रत के साथ कही और सुनी जाती है।
जितिया का पारण कब होगा
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा। पारण सामान्यतः अष्टमी तिथि समाप्त होने और सूर्योदय के बाद किया जाता है। महिलाएं स्नान और पूजा के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद अन्न-जल ग्रहण करके व्रत पूरा किया जाता है।
पारण का सटीक समय स्थान के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करेगा। इसलिए व्रती महिलाएं अपने शहर के अनुसार समय अवश्य जांच लें।
