Hal Shashthi 2026 Food Rules: हलषष्ठी यानी हरछठ का व्रत इस साल 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जा रहा है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है। हलषष्ठी को बलराम जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में रखा जाता है। इसी वजह से इस व्रत में खान-पान के नियम सामान्य व्रतों से अलग रहते हैं। 2026 में षष्ठी तिथि 2 सितंबर की सुबह शुरू होकर 3 सितंबर की सुबह तक रहेगी, इसलिए व्रत 2 सितंबर को ही रखा जा रहा है।
हलछठ पर क्या खाएं क्या नहीं
हरछठ के व्रत में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या खाएं और क्या बिल्कुल न खाएं? इस दिन हल से जुती जमीन में पैदा होने वाली फसलों का सेवन नहीं किया जाता। इसी नियम की वजह से गेहूं, सामान्य चावल और कई दूसरे अनाज व्रत के भोजन से बाहर रहते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत में क्या खा सकते हैं।
हलषष्ठी व्रत में क्या खा सकते हैं
हलषष्ठी के व्रत में मखाना और सिंघाड़ा खाया जा सकता है। दोनों ऐसी चीजें हैं जिनका संबंध पानी में या पानी के आसपास उगने वाली उपज से है। हरछठ के भोजन में इन्हें सामान्य रूप से शामिल किया जाता है। कई क्षेत्रों में महुआ और पसई या तिन्नी के चावल भी हलषष्ठी के व्रत के भोजन के रूप में लिए जाते हैं।
तिन्नी का चावल इस व्रत की खास सामग्री माना जाता है और इसे खेत में हल चलाकर पैदा होने वाले सामान्य चावल से अलग रखा जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में इसका इस्तेमाल खास तौर पर देखने को मिलता है। व्रत में भैंस के दूध, दही और घी का सेवन भी किया जाता है। कई जगह हलषष्ठी के नियम के अनुसार गाय के दूध और उससे बनी चीजों से परहेज किया जाता है, जबकि भैंस के दूध से बनी चीजें ली जाती हैं।
क्या हलषष्ठी में फल खा सकते हैं
फल को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में नियम अलग हैं। हरछठ का सबसे कड़ा नियम हल से जुती फसल को छोड़ने का है। इस कारण व्रती अपने परिवार और क्षेत्र में चली आ रही हलषष्ठी की भोजन-विधि के अनुसार फल और दूसरी सामग्री लेते हैं। जिन परिवारों में फलाहार के रूप में फल स्वीकार किए जाते हैं, वहां उन्हें भोजन में रखा जाता है। हालांकि सेब, नाशपाती और अन्य फलों का सेवन किया जा सकता है। इनको उगाने के लिए हल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
हलषष्ठी में क्या नहीं खाना चाहिए
हरछठ पर गेहूं, सामान्य चावल और हल से जुती जमीन की उपज से बचें। गाय के दूध से बनी चीजों को भी कई क्षेत्रों में वर्जित रखा जाता है। तला-भुना और सामान्य रोजमर्रा का भोजन इस व्रत की निर्धारित भोजन-विधि का हिस्सा नहीं है। शराब, मांसाहार और दूसरे नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहें। पूजा और व्रत के दौरान सात्विक आहार और निर्धारित सामग्री का ही सेवन करें।
