Maa Dhumavati Puja: कौन हैं मां धूमावती, जानिए कैसा है मां का स्वरूप, कैसे करें मां धूमावती का पूजन

Maa Dhumavati Puja: गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन मां धूमावती का पूजन किया जाता है। मां का यह स्वरूप बेहद ही शक्तिशाली है। 10 महाविद्याओं में मां धूमावती सातवीं महाविद्या हैं। मां को तंत्र साधना, रहस्य और वैराग्य की देवी माना गया है। मां का स्वरूप सामान्य देवियों से बिलकुल अलग है। आइए जानते हैं मां की पूजन विधि क्या है?

Maa Dhumavati Puja: गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन दस महाविद्याओं में से एक मां धूमावती की विशेष पूजा की जाती है। मां धूमावती को तंत्र साधना, रहस्य, वैराग्य और आत्मज्ञान की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप सामान्य देवी स्वरूप से बिल्कुल अलग है, जो संसारिक मोह, आडंबर और आकर्षण से परे आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है। मां धूमावती की साधना बाहरी सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, आत्मिक जागरण और जीवन के कष्टों से मुक्ति के लिए की जाती है। गुप्त नवरात्रि में की गई उनकी उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि यह साधना गूढ़, रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होती है। माघ माह की गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन साल 2026 में 25 जनवरी को है।

मां धूमावती पूजा विधि

मां धूमावती पूजा विधि

कौन हैं मां धूमावती?

मां धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं। उन्हें विधवा स्वरूप वाली देवी के रूप में जाना जाता है, जो सांसारिक आकर्षण, भोग-विलास और भौतिक सुखों से पूर्णतः मुक्त स्वरूप का प्रतीक हैं। वे वैराग्य, त्याग, तपस्या और आत्मज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। मां धूमावती जीवन के उस सत्य को दर्शाती हैं जहां व्यक्ति भ्रम, अहंकार और माया से ऊपर उठकर आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है। उनका स्वरूप यह संकेत देता है कि संसार की चकाचौंध अस्थायी है और वास्तविक शक्ति आत्मा की शुद्धता में निहित है।

End of Feed