Govardhan Puja Bhajan (गोवर्धन पूजा भजन लिरिक्स, गोवर्धन पूजा गीत): दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा मनाया जाता है। इस साल 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा है। आज के दिन लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा प्रकृति के प्रतीक के रूप में करेंगे। लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर इसकी पूजा करते हैं। गोवर्धन पूजा करते समय कुछ भजन भी गाए और सुने जाते हैं। यहां से आप गोवर्धन पूजा के भजन के लिरिक्स देख सकते हैं।
गोवर्धन पूजा भजन (AI Generated)
Govardhan Bhagwan Ke Bhajan (गोवर्धन भगवान के भजन लिखित में)-
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
गोवर्धन महाराज, हमारे प्रभु गोवर्धन महाराज,
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
मानसी मानसी गंगा को असनान,
धरो फिर चकलेश्वर को ध्यान,
दान घाटी में दही को दान,
करो परिक्रमा की तैयारी है गोवर्धन महाराज,
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
इंद्र को मन मर्दन कीन्हो डूबत बृज को बचाय लीन्हो,
प्रकट भये है दर्शन दीन्हो श्री नटवर की महिमा न्यारी है,
गोवर्धन महाराज
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
भक्त जन पड़े रहे चहुँ और,
संतजन पड़े रहे चहुँ और,
देख के ध्यान धरे नित घोर,
शिखर के ऊपर नाचत मोर,
कर रहे हैं बृज की रखवारी है गोवर्धन महाराज,
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
धन्य जो बात करें गिरिराज,
सिद्ध हो उनके बिगरे काज,
लाज भक्तन की रखे गिरिराज,
श्याम तेरे चरणन की बलिहारी है गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
मानसी गंगा श्री हरिदेव गिरीवर की परिक्रमा देव,
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज।
श्री गोवर्धन महाराज महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो लिरिक्स
श्री गोवर्धन महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ॥
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज…
तेरे कानन कुंडल साज रहे,
तेरे कानन कुंडल साज रहे,
ठोड़ी पे हिरा लाल, ओ लाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज…
तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरी झांकी बनी विशाल, विशाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज…
तेरी सात कोस की परिक्रमा,
तेरी सात कोस की परिक्रमा,
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज…
श्री गोवर्धन महाराज महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ॥
