आज 10 जुलाई को कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और भक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या योगिनी एकादशी पर रोटी खाना सही है और क्या इस दिन घर में गेहूं की रोटी बनानी चाहिए? दरअसल, अलग-अलग परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन अधिकांश लोग एकादशी के दिन अनाज से परहेज करते हैं।
इसलिए गेहूं के आटे की रोटी, चावल, दाल और सामान्य भोजन की जगह फलाहार या व्रत में खाई जाने वाली चुनी जाती हैं। विस्तार से जानिए क्या एकादशी पर रोटी खा सकते हैं, एकादशी पर घर में रोटी बना सकते हैं क्या।
पद्म पुराण में क्या कहा गया है?
पद्म पुराण (उत्तरखंड, अध्याय 233) के अनुसार एकादशी के दिन गेहूं, चावल, जौ, दाल और अन्य अनाज का सेवन वर्जित बताया गया है। इसलिए जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं, वे इन चीजों से बने भोजन से परहेज करते हैं और फलाहार या व्रत का भोजन ग्रहण करते हैं।
क्या एकादशी में रोटी खा सकते हैं?
अगर आप योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो सामान्य गेहूं की रोटी नहीं खाई जाती। व्रत में लोग कुट्टू, सिंहाड़े या राजगिरा के आटे से बनी रोटी खाते हैं।
क्या एकादशी पर घर में रोटी बनती है?
इसका कोई एक जैसा नियम नहीं है। कई परिवारों में पूरे घर में उस दिन अनाज नहीं पकाया जाता और सभी लोग फलाहार करते हैं। वहीं, कई घरों में केवल व्रत रखने वाले सदस्य अलग भोजन करते हैं, जबकि बाकी लोगों के लिए सामान्य रोटी और सब्जी बनाई जाती है। यह पूरी तरह परिवार की परंपरा और मान्यता पर निर्भर करता है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - आज क्या है 10 जुलाई 2026 को, आज कौन सी एकादशी है
योगिनी एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए?
योगिनी एकादशी के दिन गेहूं, चावल, दाल, मक्का, सूजी, बेसन और सामान्य अनाज से बनी चीजों से परहेज किया जाता है। कई लोग इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन भी नहीं खाते। व्रत में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, राजगिरा और सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।
