Dolyatra 2024: कब है डोल यात्रा,जानिए इसकी सही तिथि और महत्व

Dolyatra 2024: डोलयात्रा का त्योहार खासतौर पर पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। ये त्योहार होली की तरह ही मनाया जाता है। ये त्योहार भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम की याद में मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कब है डौलयात्रा और क्या है इसका महत्व।

Dolyatra 2024: बंगाली पंचांग के अनुसार डोलयात्रा का त्योहार बंगाली नववर्ष का आखिरी त्योहार होता है। ये त्योहार खासतौर पर श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम की याद में मनाया जाता है। डोलयात्रा का त्योहार ब्रज, बंगाली और असम में विशेष रूप से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि डोलयात्रा के दौरान ही कृष्ण ने राधा से अपना प्रेम प्रकट किया था। इस त्योहार को डोल पूर्णिमा, डोल यात्रा और डोल उत्सव जैसे नामों से भी जाना जाता है। ये त्योहार होली के दिन ही मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानें कि कब है डोलयात्रा और क्या है इसका महत्व।

Dolyatra 2024

Dolyatra 2024 Date (डोलयात्रा कब है 2024)

डोलयात्रा का त्योहार हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। इसे डोल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 24 मार्च को सुबह 9 बजे हो रही है और इसका समापन 25 मार्च को 12 बजकर 29 मिनट पर होगा। ऐसे में डोलयात्रा 25 मार्च को मनाई जाएगी। इसी दिन होली का भी त्योहार मनाया जाएगा।

डोलयात्रा कैसे मनाते हैं (How to celebrate Dolyatra)

डोलयात्रा का पर्व दो दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत होलिका दहन के दिन से होती है। पहले दिन को "गोंध" के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी को प्रतिमा को चारों तरफ घुमाया जाता है। इस दिन भजन किर्तन किया जाता है। दूसरा दिन भोर-देउल या डोल के नाम से जाना जाता है। इस दिन अपने बड़ों को रंग लगाया जाता है। उसके बाद सबके साथ रंग अबीर खेला जाता है।

डोलयात्रा महत्व (Dolyatra Importance)

धार्मिक और समाजिक दोनों ही रूप में डोलयात्रा का बहुत महत्व है। इस दिन लोग सारे भेदवभाव को भूलाकर एक साथ मिलकर ये पर्व मनाते हैं। इस दिन एक दूसरे को रंग लगाकर आपसी प्रेम दर्शाते हैं। इस दिन लोग रंग अबीर उड़ाते हैं और महिलाएं लोकगीत गाती हैं। इस दिन राधा कृष्ण की भक्ति की जाती है और यात्रा निकाली जाती है।

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