Dhanvantri Ji Ki Aarti Lyrics: धनतेरस का त्योहार केवल धन और समृद्धि की कामना का ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना का भी पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनकी पूजा करने से आरोग्य, सुख और खुशहाली की कामना की जाती है।
धन्वंतरि जी की आरती के लिरिक्स
वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व आज यानी 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती के लिए शाम का समय शुभ रहेगा। अगर आप भी धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा करना चाहते हैं, तो इस लेख में जानें आरती का शुभ मुहूर्त, पूजा का महत्व और भगवान धन्वंतरि की संपूर्ण आरती।
धन्वंतरि जी की आरती कब करें?
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर 2026 की शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस समय प्रदोष काल और वृषभ काल का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में आप इस समय में भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती कर सकते हैं।
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भगवान धन्वंतरि जी की आरती | Dhanvantari Aarti Lyrics in Hindi
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
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धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। उनके हाथों में अमृत कलश, शंख, चक्र और औषधियां सुशोभित रहती हैं। धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके लोग अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना करते हैं। उनकी आराधना से जीवन में आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
