Chaurchan 2026 Moon Rise Timing Today Live Updates: मिथिलांचल में मनाया जाने वाला चौरचन पर्व इस साल 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। गणेश चतुर्थी के साथ पड़ने वाला यह पर्व खास तौर पर चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा से जुड़ा है। शाम होते ही व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य चंद्र दर्शन का इंतजार करते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आज आपके शहर में चौरचन (Chaurchan 2026) का चांद कब दिखाई देगा और अर्घ्य देने का सही समय क्या रहेगा?
चौरचन का चांद कितने बजे दिखेगा
चौरचन पर चांद को अर्घ्य देने की परंपरा
चौरचन जिसे कई जगह चौठ चंद्र या चौरचन पूजा भी कहा जाता है, मिथिला क्षेत्र की महत्वपूर्ण लोक-परंपराओं में शामिल है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर शाम के समय चंद्रमा की पूजा करती हैं और उन्हें अर्घ्य देती हैं। मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संतान की खुशहाली की कामना पूरी होती है। इस पर्व की खास बात यह है कि यहां केवल चंद्रमा के उदय का इंतजार नहीं किया जाता, बल्कि सूर्यास्त के बाद चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है।
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आज शाम कब दिखेगा चौरचन का चांद?
खगोलीय गणना के अनुसार 14 सितंबर को इन शहरों में चंद्रमा सुबह ही उदित हो चुका है, लेकिन शाम के समय सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में चंद्रमा का दर्शन किया जा सकेगा। स्थानीय समय के अनुसार प्रमुख शहरों में चंद्रास्त लगभग साढ़े सात बजे के आसपास रहेगा। इसलिए पूजा और अर्घ्य के लिए शाम का समय महत्वपूर्ण है।
चौरचन में चंद्रोदय का समय
| शहर | सूर्यास्त | चंद्रास्त | अर्घ्य के लिए समय |
|---|---|---|---|
| जनकपुरधाम | 6:07 PM | 7:51 PM | 6:07–7:51 PM |
| सहरसा | 5:49 PM | 7:34 PM | 5:49–7:34 PM |
| कटिहार | 5:45 PM | 7:30 PM | 5:45–7:30 PM |
| मधुबनी | 5:52 PM | 7:36 PM | 5:52–7:36 PM |
| बेगूसराय | 5:50 PM | 7:36 PM | 5:50–7:36 PM |
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चौरचन पूजा की थाली में क्या रखें?
चौरचन पूजा में महिलाएं घर पर पकवान और फल तैयार करती हैं। पूजा की थाली में मौसमी फल, मिठाई, पकवान और अर्घ्य के लिए जल रखा जाता है। इसके बाद परिवार के लोग चंद्रमा का दर्शन कर उन्हें जल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
चंद्रास्त से पहले दें अर्घ्य
चौरचन के दिन एक बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि अर्घ्य के लिए बहुत देर रात तक इंतजार न करें। इस बार चंद्रमा शाम के बाद ही अस्त हो जाएगा। इसलिए अपने शहर के सूर्यास्त के बाद से चंद्रास्त तक पूजा और अर्घ्य की तैयारी पूरी कर लेना बेहतर रहेगा। मिथिलांचल के शहरों में यह अंतर कुछ मिनट का है, इसलिए स्थानीय क्षितिज और मौसम के कारण वास्तविक दर्शन में मामूली अंतर संभव है।
