Chaudas Kab Ki Hai August 2026 (Chaturdashi kis tarikh ki hai): अगस्त 2026 की चौदस की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि चतुर्दशी तिथि 26 अगस्त की सुबह शुरू होकर 27 अगस्त की सुबह समाप्त होगी। ऐसे में कुछ पंचांगों में चौदस 26 अगस्त लिखी है, जबकि उदया तिथि के अनुसार इसे 27 अगस्त से जोड़ा जा रहा है।
सावन शुक्ल चौदस कब है, 26 या 27 अगस्त में से किस दिन लगेगी चतुर्दशी तिथि
पंचांग के अनुसार अगस्त की यह चतुर्दशी सावन शुक्ल पक्ष में पड़ेगी। धार्मिक मान्यताओं में शुक्ल पक्ष की चौदस को पूजा-पाठ, भगवान शिव के जलाभिषेक और दान के लिए खास माना जाता है।
अगस्त 2026 में चौदस कब है
चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 अगस्त 2026, बुधवार को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर होगा। तिथि का समापन 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 08 मिनट पर होगा।
| विवरण | तारीख और समय |
|---|---|
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 25 अगस्त 2026, सुबह 6:20 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 26 अगस्त 2026, सुबह 7:59 बजे |
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 26 अगस्त 2026, सुबह 7:59 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 27 अगस्त 2026, सुबह 9:08 बजे |
| उदया तिथि के अनुसार चौदस | 27 अगस्त 2026, गुरुवार |
दिए गए पंचांग समय की पुष्टि दृक पंचांग और Prokerala के चतुर्दशी कैलेंडर में भी होती है।
चौदस 26 अगस्त को है या 27 अगस्त को
पंचांग की तिथि सूर्योदय से रात 12 बजे तक सीमित नहीं होती। वह दिन में किसी भी समय शुरू और समाप्त हो सकती है। इसी वजह से एक ही तिथि दो अंग्रेजी तारीखों में पड़ती दिखाई देती है।
चतुर्दशी तिथि 26 अगस्त की सुबह 7:59 बजे शुरू हो जाएगी। इसलिए 26 अगस्त के अधिकांश समय चतुर्दशी रहेगी। लेकिन 27 अगस्त को सूर्योदय के समय भी चतुर्दशी तिथि मौजूद होगी। सामान्य धार्मिक मान्यता में सूर्योदय के समय रहने वाली तिथि को उस दिन की उदया तिथि माना जाता है।
इस आधार पर उदया तिथि के अनुसार चौदस 27 अगस्त 2026, गुरुवार को मानी जाएगी। हालांकि, जिस पूजा या अनुष्ठान में चतुर्दशी तिथि के किसी खास समय- जैसे रात, प्रदोष या मध्याह्न- का नियम हो, उसकी तारीख अलग हो सकती है।
सावन शुक्ल चौदस का धार्मिक महत्व
यह सावन के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना, शिव मंत्र का जाप करना और जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है।
चतुर्दशी के ठीक बाद पूर्णिमा आती है। इस कारण चौदस को पूर्णिमा से पहले मन और घर की तैयारी के दिन के रूप में भी देखा जाता है। कई परिवार इस दिन घर की सफाई करते हैं, सात्विक भोजन बनाते हैं और अगले दिन की पूजा की तैयारी शुरू कर देते हैं।
चौदस के दिन क्या करना चाहिए
चौदस के दिन पूजा को कठिन बनाने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा से किए गए छोटे काम भी पर्याप्त माने जाते हैं।
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- भगवान शिव को जल अर्पित करें।
- बेलपत्र उपलब्ध हो तो शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
- घर के मंदिर में घी या तेल का दीपक जलाएं।
- किसी जरूरतमंद को अन्न, फल या अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
- क्रोध, कटु भाषा और किसी का अपमान करने से बचें।
- व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
क्या चौदस पर व्रत रखा जाता है
चतुर्दशी पर व्रत रखने की परंपरा हर परिवार और क्षेत्र में एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग भगवान शिव की पूजा के साथ उपवास रखते हैं, जबकि कई लोग केवल सात्विक भोजन और पूजा का संकल्प लेते हैं। यदि घर में पहले से चौदस का व्रत रखने की परंपरा है तो उसका पालन किया जा सकता है।
सेहत ठीक न होने, गर्भावस्था, बुजुर्ग अवस्था या नियमित दवा लेने की स्थिति में निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसे में सामान्य भोजन करते हुए भी पूजा और मंत्र जाप किया जा सकता है।
