Navratri Vrat Katha (श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा pdf): चैत्र नवरात्रि का त्योहार माता रानी के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु माता की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं। कहते हैं जो भक्त सच्चे मन से नवरात्रि के व्रत रखता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस पर्व के हर दिन मां दुर्गा के एक अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। साथ ही हर दिन की कथा और आरती भी अलग-अलग होती है। लेकिन यहां हम आपको माता रानी की एक ऐसी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप नवरात्रि के हर दिन पढ़ सकते हैं।
Chaitra Navratri Katha In Hindi
नवरात्रि व्रत कथा (Navratri Vrat Katha)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय महिषासुर नामक राक्षस का आतंक धरती पर काफी बढ़ गया था। महिषासुर को वरदान था कि उसे कोई देव या दानव नहीं मार सरता है। इस वरदान को पाते ही महिषासुर ने हर जगह अपना आतंक फैला दिया था। इस राक्षस ने स्वर्ग तक पर अपना अधिकार जमा लिया था। जिसके बाद सभी देवता अपनी रक्षा के लिए भगवान भोलेनाथ की शरण में पहुंचे। तब देवी पार्वती ने अपने अंश से नौ रूप प्रकट किए, जिन्हें सभी देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। ऐसी मान्यता है कि ये पूरी प्रक्रिया चैत्र माह के प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे 9 दिनों तक चली। मान्यताओं के मुताबिक, तब से ही चैत्र महीने में नवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा शुरू हो हई। कहा जाता है कि नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा ने उस राक्षस का अंत कर दिया था।
चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी भी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था। इसलिए चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले मां दुर्गा की उपासना की थी।
