Bhaav 2025: आध्तामिक गुरु श्री श्री रविशंकर के दृष्टिकोण ने इस सांस्कृतिक महा कुंभ को दिशा दी है और उनके द्वारा अगर एक भी संस्कृति, धर्म या सभ्यता खत्म हो जाए तो दुनिया निर्धन हो जाएगी। हर संस्कृति विश्व की धरोहर का हिस्सा रही है, और हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें संजोकर रखें। वर्ष भाव 2025 में समावेशित को विशेष रूप से केंद्रित किया गया है। भारत के सांस्कृतिक इतिहास में ट्रांसजेंडर समाज के लोगों के योगदान को सम्मान देते हुए, ये फेस्टिवल उनके अनोखे सफर को मंच प्रदान करेगा। पद्मश्री मंजम्मा जोगथी, जो जोगथी नृत्य का नेतृत्व करने वाली और कर्नाटक जनपद अकादमी की पहली ट्रांसजेंडर अध्यक्ष हैं यहां अपनी प्रेरणादायक जीवन यात्रा को साझा करेंगी। वहीं, सुशांत दिवगीकर अपने जोशीले प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने को उत्साहित हैं। कोलकाता से रात्रि दास के नेतृत्व में 10 ट्रांसजेंडर कलाकार भारतनाट्यम की प्रस्तुति ‘सप्त मातृका’ देंगे, जिसे नारी शक्ति का माना जाता है। संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में इस आयोजन को और भी खास बनाएगी। अभिनेत्री प्राजक्ता माली अपने अनोखे अंदाज में दर्शकों अपनी कला को कला को पेश करेंगी।
Bhaav 2025 in Noida
सितारों से सजी शाम
भाव 2025 में देश के जाने-माने कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आते हैं। पद्मविभूषण सोनल मानसिंह, वीणा वादक आर. विश्वेश्वरन, और मृदंग वादक ए.वी. आनंद जैसे दिग्गज कलाकार इस बार भाव 2025 की शोभा बढ़ाएंगे। इनके अलावा, कथक नृत्य में मनीषा साठे और कर्नाटक से प्रसिद्ध संगीतकार राजम शंकर अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर देंगे। आधुनिकता और परंपरा के संगम को दर्शाते हुए अदिति मंगालदास भी कथक नृत्य का अनोखी प्रस्तुतिकरण करेंगी।
लुप्त परंपराओं का पुनर्जागरण
भाव 2025 का का मुख्य पहलू भारत की लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित करना भी है। इस वर्ष मध्य प्रदेश के लोक नाट्य माच को केंद्र में रखा गया है, जिसे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रस्तुत प्राचीन काल से प्रस्तुत करते आ रहे हैं। लेकिन पद्मश्री ओमप्रकाश शर्मा की पहल से इस बार माच नृत्य में महिलाएं भी हिस्सा लेंगी, जो इस प्राचीन कला के इतिहास में एक नई शुरुआत होगी।
भाव एक्सपो
भाव एक्सपो 2025 में आपको भारत की कलात्मक धरोहर को और करीब से जानने का मौका मिलेगा। यहां मधुबनी, कलमकारी, केरल म्यूरल पेंटिंग और गोंड कला जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प की शानदार कार्यशालाएं आयोजित होंगी। आप यहां पर हैंडलूम, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल्स पर खरीदारी का भी आनंद ले सकते हैं। एक्सपो में आदिवासी नृत्य से लेकर केरल की त्यागराज आराधना के कार्यक्रम भी शामिल रहेंगे।
पीढ़ियों का संगम
ये महोत्स हर उम्र के कलाकारों और दर्शकों के लिए है। यहां 93 वर्षीय वीणा वादक आर. विश्वेश्वरन ‘कलासारथी अवार्ड’ से सम्मानित होंगे, वहीं 8 साल के नन्हे कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। कला और नए विचारों के ये संगम कलाकारों, छात्रों और कला प्रेमियों के लिए सीख और प्रस्तुति का एक दिलचस्प पल हो सकता है और आगे बढ़ सकते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में इस अद्भुत सांस्कृतिक महा कुंभ का हिस्सा बनने से आप भारत की विविधता, प्रतिभा और आध्यात्मिकता का भी अनुभव करेंगे।
